उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र को निर्धारित तिथि से पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के निर्णय पर सियासत गरमा गई है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने योगी आदित्यनाथ नीत सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार विपक्ष की तीखी घेराबंदी और जनहित के ज्वलंत सवालों से घबराकर सदन को समय से पहले समाप्त कर भाग खड़ी हुई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय जनता पार्टी को अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ियों और प्रदेश में गहराए किसानों के खाद संकट पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
संसदीय परंपराओं को ताक पर रखने का आरोप
बुधवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में कांग्रेस नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि लोकतांत्रिक और संसदीय व्यवस्था में जनहित के मुद्दों पर खुली चर्चा होना अनिवार्य है। परंतु, वर्तमान सरकार लगातार लोकतांत्रिक मर्यादाओं और परंपराओं की उपेक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि पूर्ण बहुमत की आड़ में सत्तापक्ष विपक्ष की आवाज को दबाने का काम कर रहा है। यदि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं था, तो उसे विधानमंडल के पटल पर विपक्ष के हर एक प्रश्न का पारदर्शी तरीके से जवाब देना चाहिए था, न कि सदन की कार्यवाही को इस तरह अचानक स्थगित करना चाहिए था।
नियम-311 और नियम-56 के तहत मांगी गई थी चर्चा
विधानमंडल दल की नेता ने उजागर किया कि कांग्रेस पार्टी ने नियम-311 और नियम-56 के तहत उत्तर प्रदेश के दो अति-महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील विषयों पर तुरंत चर्चा कराए जाने का नोटिस दिया था। इसमें पहला विषय अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान व चढ़ावे में कथित हेराफेरी का था, जबकि दूसरा विषय राज्य भर में अन्नदाताओं को हो रही रासायनिक खाद की भारी किल्लत का था। इन दोनों ही गंभीर विषयों पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी थी, लेकिन कार्यसूची के विपरीत बहस से बचते हुए सदन को ही समाप्त घोषित कर दिया गया।
‘6 अगस्त तक चलना था सत्र, फिर अचानक क्यों हुआ बंद?’
आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने सरकार की मंशा पर कड़ा सवाल उठाते हुए पूछा कि जब राज्य विधानसभा का यह मानसून सत्र पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 6 अगस्त तक चलना तय था, तो फिर ऐसी क्या हड़बड़ी थी कि इसे समय सीमा से पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी संवैधानिक जवाबदेही से पल्ला झाड़ने के लिए सत्तापक्ष उलटे विपक्ष पर आरोप मढ़ने का खेल खेल रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश की जनता यह भली-भांति समझ रही है कि सरकार किन मुद्दों पर जवाब देने से कतरा रही है और सच्चाई का सामना करने से डर रही है।





















































