उपमुख्यमंत्री के विवादित बयान से उपजा राजनीतिक तूफान
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं, जिससे राजनीतिक पारा अचानक चढ़ गया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा मदरसों और उनमें दी जाने वाली शिक्षा पर दिए गए एक बेहद विवादित बयान ने प्रदेश में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। उत्तर प्रदेश विधान भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए डिप्टी सीएम ने सीधे तौर पर कहा कि मदरसा शिक्षा प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के भीतर आतंकी मानसिकता विकसित होती है। उनके इस वक्तव्य के सार्वजनिक होते ही विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने सत्तापक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
‘नहीं बोलते भारत माता की जय’: केशव प्रसाद मौर्य
केशव प्रसाद मौर्य ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जिस किसी भी व्यक्ति को मदरसे में शिक्षा दी जाती है, वह न तो ‘भारत माता की जय’ का उद्घोष करता है और न ही राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ गाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार के शिक्षण संस्थानों से निकलने वाले लोगों के भीतर एक विशेष प्रकार की उग्रवादी या आतंकवादी सोच घर कर जाती है। उपमुख्यमंत्री के इस तीखे बयान ने राज्य के शैक्षिक और सामाजिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है।
शिवपाल यादव का कड़ा प्रहार: ‘भाजपा कार्यालयों में पलते हैं उग्रवादी’
डिप्टी सीएम के इस आरोप पर मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक शिवपाल सिंह यादव ने बिना देर किए बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया। केशव मौर्य के बयानों को पूरी तरह खारिज करते हुए शिवपाल यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी खुद ही ऐसे असामाजिक तत्वों को संरक्षण देती है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के कार्यालयों और उनके नेताओं के घरों में ऐसे लोगों को प्रशिक्षण दिया जाता है और वे वहीं पाए जाते हैं। सपा नेता ने सत्ताधारी दल पर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाया।
जमीयत उलमा-ए-हिंद के मौलाना मदनी का तीखा हमला
दूसरी ओर, देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन ‘जमीयत उलमा-ए-हिंद’ ने भी उपमुख्यमंत्री के इस वक्तव्य को ‘सांप्रदायिकता की पराकाष्ठा’ करार दिया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने बयान की कठोर शब्दों में भर्त्सना करते हुए कहा कि जिनके पूर्वजों ने अंग्रेजी हुकूमत के सामने दया याचिकाएं लगाई थीं, वे आज देश के ऐतिहासिक मदरसों पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। मदनी ने कहा कि एक उच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा दिया गया ऐसा भड़काऊ और गैर-जिम्मेदाराना बयान न केवल उस पद की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि देश के संविधान और स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास का भी अपमान करता है।
‘आजादी के आंदोलन में मदरसों का रहा ऐतिहासिक योगदान’
मौलाना अरशद मदनी ने स्वतंत्रता संग्राम के पन्नों को पलटते हुए याद दिलाया कि जिन मदरसों को आज कटघरे में खड़ा किया जा रहा है, उन्हीं संस्थानों से निकले इस्लामी विद्वानों (उलमा) ने सबसे पहले ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका था। उन्होंने हंसते-हंसते फांसी के फंदों को गले लगाया और विदेशी शासन के आगे कभी घुटने नहीं टेके। उन्होंने कहा कि संवैधानिक शपथ लेने वाले जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों का पहला कर्तव्य समाज में आपसी भाईचारा, विश्वास और सौहार्द को मजबूत करना है, न कि ऐसे विभाजनकारी बयानों से करोड़ों नागरिकों की भावनाओं को आहत करना।




















































