विवादों के बीच सार्वजनिक जीवन में वापसी
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय आखिरकार करीब दो महीने के लंबे अंतराल के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी के गंभीर आरोप लगने के बाद से ही वे सार्वजनिक गतिविधियों से दूर नजर आ रहे थे। मंगलवार को अयोध्या स्थित प्रसिद्ध तपस्वी छावनी मंदिर पहुंचकर उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस दौरान तपस्वी छावनी के मुख्य महंत परमहंस आचार्य ने परंपरा अनुसार उनका भव्य और औपचारिक स्वागत किया। इसके पश्चात दोनों प्रमुख शख्सियतों के मध्य एक बंद कमरे में लंबी बैठक आयोजित की गई, हालांकि इस बातचीत के आधिकारिक मुख्य बिंदुओं को अभी गोपनीय ही रखा गया है।
साधु-संतों की खास अपील: ‘अयोध्या न छोड़ें चंपत राय’
बैठक के संपन्न होने के बाद मीडिया जगत से बात करते हुए जगतगुरु परमहंस आचार्य ने चंपत राय के पक्ष में मजबूत रुख अपनाया। उन्होंने राम मंदिर के निर्माण में चंपत राय के अद्वितीय योगदान की जमकर सराहना की। महंत परमहंस आचार्य ने स्पष्ट रूप से कहा कि भव्य और दिव्य राम मंदिर का निर्माण चंपत राय के कुशल मार्गदर्शन और नेतृत्व में ही संभव हो पाया है, जिसके लिए संपूर्ण समाज में उनका स्थान बेहद आदरणीय है। उन्होंने यह भी साझा किया कि अयोध्या के समस्त साधु-संतों ने उनसे एक विशेष आग्रह किया है। संतों की इच्छा है कि वे स्थायी रूप से अयोध्या धाम में ही निवास करें। इस अपील को स्वीकार करते हुए चंपत राय ने जीवन की अंतिम सांस तक अयोध्या में ही रहने का संकल्प व्यक्त किया है।
चढ़ावा गबन विवाद का पूरा घटनाक्रम
उल्लेखनीय है कि चालू वर्ष के जून माह के पहले सप्ताह में राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला अचानक सामने आया था। इस खुलासे के बाद पूरे देश का सियासी माहौल गरमा गया। विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस मुद्दे को सड़क से लेकर उत्तर प्रदेश विधानसभा और देश की संसद तक में जोर-शोर से उठाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश शासन ने मामले की त्वरित जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया था।
एसआईटी जांच के बाद 8 आरोपी जा चुके हैं जेल
विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी, जिसके आधार पर गत 25 जून को मामले में औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई। पुलिस और जांच एजेंसी द्वारा की गई ताबड़तोड़ कार्रवाई में यह बात उजागर हुई कि दान की राशि की गिनती में हेरफेर कर गबन की एक बड़ी साजिश रची गई थी। इस आपराधिक षड़यंत्र में कथित रूप से लिप्त 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। फिलहाल मामले की विस्तृत कानूनी जांच जारी है, वहीं चंपत राय की संतों के साथ हुई इस नई मुलाकात ने अयोध्या के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर फिर से तेज कर दिया है।




















































