लखनऊ:
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने युवाओं को आधुनिक राष्ट्र निर्माण का मुख्य आधार बताते हुए कहा कि शिक्षा केवल प्रमाण पत्र प्राप्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसका मूल उद्देश्य ऐसे चरित्रवान और जिम्मेदार व्यक्तित्व का निर्माण करना है जो समता, न्याय, स्वतंत्रता और आपसी बंधुत्व के लोकतांत्रिक मूल्यों से प्रेरित होकर देश की प्रगति में सक्रिय योगदान दे सकें। लखनऊ स्थित बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आज न केवल आर्थिक मजबूती हासिल कर रहा है, बल्कि अपने सांस्कृतिक गौरव, सभ्यतागत पहचान और आंतरिक क्षमताओं पर अटूट भरोसा करने वाले राष्ट्र के रूप में स्थापित हो चुका है। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की वास्तविक शक्ति ‘बिलीव इन इंडिया’ के इसी राष्ट्रीय आत्मविश्वास में निहित है।
हेड, हार्ट और हैंड का समन्वय ही सच्ची शिक्षा: रक्षा मंत्री
विश्वविद्यालयों की भूमिका को रेखांकित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान मात्र ज्ञान वितरण के केंद्र नहीं, बल्कि उच्च कोटि के नागरिक और आदर्श समाज गढ़ने की कार्यशालाएं हैं। उपाधि प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि डिग्री जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं, अपितु असीम संभावनाओं की ओर खुलने वाला पहला द्वार है। उन्होंने बल देकर कहा कि यदि ज्ञान के साथ मानवीय संस्कार न हों, तो वह अधूरा है; संस्कारों में यदि संवेदनशीलता का समावेश न हो, तो व्यक्तित्व अपूर्ण रह जाता है; और यदि इस पूरे सामंजस्य में राष्ट्र और समाज के प्रति निष्ठा का अभाव हो, तो शिक्षा का मूलभूत ध्येय ही निरर्थक हो जाता है। वास्तविक शिक्षा व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता (हेड), आंतरिक संवेदना (हार्ट) और व्यावहारिक क्रियान्वयन (हैंड) के संतुलित विकास से ही संभव है। युवाओं को केवल समस्याओं पर चर्चा करने के बजाय उनके ठोस समाधान का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।
डॉ. अंबेडकर के आदर्श और राष्ट्र निर्माण का संकल्प
बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के ऐतिहासिक योगदान का स्मरण करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि घोर सामाजिक विषमताओं और भेदभाव का सामना करने के उपरांत भी उन्होंने कभी हिंसा का मार्ग नहीं चुना, बल्कि शिक्षा और विधि के शासन को परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया। उन्होंने डॉ. अंबेडकर के प्रसिद्ध सूत्र ‘शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित हो’ का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि युगांतरकारी बदलाव मात्र भीड़ से नहीं, अपितु सुदृढ़ संकल्प, सत्यनिष्ठा और समर्पण की भावना से आते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि युवा केवल आजीविका की तलाश करने वाले न बनें, बल्कि ऐसे उद्यमी और नवप्रवर्तक बनें जो समाज के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित कर सकें।
अंतरिक्ष विज्ञान में वैश्विक शक्ति बनकर उभरा नया भारत
देश की वैज्ञानिक प्रगति का खाका खींचते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष सफर कभी साइकिल और बैलगाड़ी पर रॉकेट के पुर्जे ढोने से प्रारंभ हुआ था, किंतु आज वही भारत मंगल ग्रह तक अपनी सफल पहुंच बना चुका है। सौर अन्वेषण मिशन की शुरुआत के साथ देश अब स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन और मानवयुक्त अभियानों की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। उन्होंने स्मरण कराया कि कभी विदेशी मीडिया भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों पर कटाक्ष करता था, परंतु आज वैश्विक मंचों पर भारत की आवाज को अत्यंत गंभीरता से सुना जाता है। भारत अब मात्र वैश्विक नियमों का अनुसरण करने वाला देश नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नीतियां निर्धारित करने वाले अग्रणी राष्ट्रों में शामिल हो चुका है।
नवाचार और स्टार्टअप्स में भारत की ऐतिहासिक छलांग
पिछले एक दशक के आर्थिक व तकनीकी रूपांतरण का विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के बीच भारत ने आत्मनिर्भरता का मार्ग चुना। सेमीकंडक्टर विनिर्माण, मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में देश ने अभूतपूर्व गति प्राप्त की है। इसके ठोस परिणाम स्पष्ट दिख रहे हैं:
- वैश्विक नवाचार सूचकांक (GII) में भारत वर्ष 2015 के 81वें पायदान से उल्लेखनीय छलांग लगाकर वर्ष 2025 में 38वें स्थान पर पहुंच गया है।
- पंजीकृत पेटेंट की संख्या में कई गुना तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है।
- भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है।
- देश के युवा अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं और हाइड्रोजन ट्रेन, उन्नत ड्रोन तकनीक तथा यूनिकॉर्न उद्यमों के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
सांस्कृतिक गौरव और ‘टीम इंडिया’ की भावना से 2047 का विजन
रक्षा मंत्री ने कहा कि अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर बजटीय खर्च को दोगुना किया गया है तथा 34 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आधुनिक एवं व्यावहारिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई है। उन्होंने रेखांकित किया कि किसी भी देश का समग्र विकास केवल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि से संभव नहीं है; इसके लिए नागरिकों में अपनी भाषा, ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर के प्रति गहरा स्वाभिमान होना आवश्यक है। वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने के लिए प्रत्येक नागरिक को ‘टीम इंडिया’ की सामूहिक भावना के साथ कार्य करना होगा। युवाओं के अदम्य सामर्थ्य के बल पर भारत को वैश्विक महाशक्ति बनने से कोई शक्ति नहीं रोक सकती।





















































