उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जनपद अंतर्गत सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग से सटे ग्रामीण इलाके में तेंदुए के हमले से भारी तबाही मची है। खदगोरा गांव में देर रात एक खूंखार तेंदुए ने मवेशियों के बाड़े में घुसकर दर्जनों मूक पशुओं को अपना शिकार बना लिया। इस अप्रत्याशित वन्यजीव हमले में 87 भेड़ों की जान चली गई, जबकि 14 भेड़ें गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल व्याप्त है और वन महकमे की टीम जांच में जुट गई है।
रात के सन्नाटे में बाड़े में घुसा जंगली जानवर
वन विभाग के उप रेंज अधिकारी बजरंगी प्रसाद द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक वाकया गैसड़ी ग्राम पंचायत क्षेत्र के वार्ड संख्या 10 का है। यहां के स्थानीय निवासी कन्हैया पाल और उनके भाई विजय पाल ने आजीविका के लिए मवेशी पाल रखे थे। रविवार की दरम्यानी रात जब परिवार सो रहा था, तभी जंगल की तरफ से आया तेंदुआ बाड़े की चारदीवारी पार कर अंदर घुस गया और उसने झुंड पर हमला बोल दिया।
सुबह बाड़े में दिखा भयावह मंजर, पगचिह्नों से तेंदुए की पुष्टि
सोमवार तड़के जब पशुपालक रोजमर्रा की तरह अपने बाड़े में पहुंचे, तो वहां का दृश्य देखकर स्तब्ध रह गए। बाड़े के भीतर 87 भेड़ें मृत अवस्था में पड़ी मिलीं, जबकि 14 भेड़ें बुरी तरह घायल थीं। सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और पशु चिकित्सकों का दल मौके पर रवाना हुआ। घटनास्थल की बारीकी से जांच करने पर जमीन पर तेंदुए के स्पष्ट पगचिह्न (पगमार्क) पाए गए, जिससे तेंदुए के हमले की पुष्टि हुई। घायल भेड़ों के उपचार के लिए डॉक्टरों की टीम जुटी हुई है और घटना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जा रही है।
गरीब पशुपालकों के लिए 10-10 लाख रुपये मुआवजे की मांग
इस दुखद घटना की सूचना पाकर स्थानीय विधायक राकेश कुमार यादव तत्काल प्रभावित परिवार से मिलने पहुंचे और उन्होंने पीड़ित पशुपालक भाइयों को ढांढस बंधाया। क्षेत्रीय विधायक ने कहा कि पीड़ित बेहद निर्धन पृष्ठभूमि से आते हैं और भेड़ पालन ही उनके परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र आधार था। उन्होंने राज्य सरकार और प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित पशुपालकों को हुई अपार आर्थिक क्षति को देखते हुए उन्हें 10-10 लाख रुपये की दर से आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि वे दोबारा अपना जीवनयापन शुरू कर सकें।




















































