भारतीय निर्वाचन प्रक्रिया की प्रामाणिकता और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की तकनीकी सुरक्षा को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। राजधानी लखनऊ के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे मुख्य चुनाव आयुक्त ने छात्रों से संवाद करते हुए स्पष्ट किया कि देश में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित और स्टैंडअलोन डिवाइस हैं, जिनका किसी भी बाहरी नेटवर्क या वायरलेस तकनीक से कोई जुड़ाव नहीं होता। उन्होंने युवाओं को चुनावी व्यवस्था में पूर्ण विश्वास रखने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उत्साहपूर्वक भाग लेने का संदेश दिया।
ईवीएम की तकनीकी सुरक्षा और निर्माण प्रक्रिया
कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज में आयोजित संवाद कार्यक्रम में छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ने ईवीएम की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय वोटिंग मशीनों का निर्माण भारत सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनियों (PSUs) द्वारा किया जाता है। ये मशीनें किसी भी नेटवर्क पर काम नहीं करतीं, यानी इनमें इंटरनेट, ब्लूटूथ अथवा वाई-फाई कनेक्टिविटी जैसी कोई सुविधा नहीं होती है। इस तकनीकी विशेषता के कारण इन्हें रिमोटली या वायरलेस माध्यम से प्रभावित करना पूरी तरह असंभव है।
फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहने की सलाह
डिजिटल युग में गलत जानकारियों के प्रसार पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ने विद्यार्थियों को सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और फेक न्यूज से सतर्क रहने को कहा। उन्होंने बल दिया कि किसी भी सूचना या खबर पर भरोसा करने से पूर्व उसके मूल स्रोत और उसकी सत्यता की गहन पड़ताल करना हर नागरिक का दायित्व है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे बिना प्रमाण के प्रसारित होने वाले दावों से बचें और तथ्यों की पुष्टि के आधार पर ही अपनी राय बनाएं।
पारदर्शी चुनावी ऑडिट और राजनीतिक दलों की भागीदारी
पत्रकारों और शिक्षकों से वार्ता करते हुए उन्होंने बताया कि भारत में चुनाव पूरी तरह संविधान, प्रासंगिक कानूनों और तय दिशानिर्देशों के दायरे में आयोजित होते हैं। चुनावी प्रणाली के प्रत्येक चरण की निगरानी के लिए मजबूत तंत्र स्थापित है। मतदाता सूची के निर्माण से लेकर मतदान और मतगणना तक हर स्तर पर राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के अधिकृत एजेंट मौजूद रहते हैं, जो पूरी प्रक्रिया का वास्तविक समय में ऑडिट करते हैं। उत्तर प्रदेश के 20 जनपदों से आए प्राचार्यों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं के साथ हुए इस सार्थक संवाद पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा और उनकी टीम की सराहना की।
संविधान के अनुच्छेद 326 और युवा मतदाताओं का आह्वान
संविधान के अनुच्छेद 326 का संदर्भ देते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने युवाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ बताया। उन्होंने 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके सभी पात्र विद्यार्थियों से मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की अपील की। उन्होंने रेखांकित किया कि आज डिजिटल माध्यमों से वोटर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बेहद सहज हो चुकी है। युवाओं को न केवल स्वयं मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए, बल्कि अपने परिवार एवं समाज को भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए।
व्यक्तिगत जीवन के अनुभव और लोकतंत्र का विशाल दायरा
संवाद के दौरान ज्ञानेश कुमार ने अपने छात्र जीवन के प्रसंग भी साझा किए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार विदेश जाने का अवसर मिलने के बावजूद मातृभूमि की सेवा के संकल्प और अपनी माताजी की प्रेरणा से उन्होंने प्रशासनिक सेवा की राह चुनी। केरल कैडर से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की यात्रा शुरू कर आज विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक तंत्र के संचालन तक पहुंचने का अनुभव उन्होंने विद्यार्थियों के समक्ष रखा। उन्होंने उल्लेख किया कि देश में लगभग 100 करोड़ मतदाताओं के साथ चुनाव संपन्न कराना एक अभूतपूर्व और व्यापक प्रशासनिक जिम्मेदारी है, जिसे आयोग पूरी निष्पक्षता और दृढ़ता के साथ निभाता है।




















































