लखनऊ:
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्वास्थ्य ढांचे की बदहाली, जनसुविधाओं के अभाव और सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण के मुद्दे पर प्रदेश सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक न्याय और पिछड़े, दलित तथा अल्पसंख्यक (पीडीए) वर्गों की एकजुटता ने संकीर्ण मानसिकता वाले राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश की जनता से वादा किया कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार की वापसी होते ही संपूर्ण चिकित्सा तंत्र को जनहितैषी बनाया जाएगा, जहां हर निर्धन को बिना किसी शर्त या विशेष कार्ड के पूर्णतः निःशुल्क उपचार और दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
‘पीडीए’ की ताकत से राजनीतिक विरोधियों में घबराहट: सपा प्रमुख
सपा के राज्य मुख्यालय पर आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि संकीर्ण सोच में बंधे लोग ‘पीडीए’ के विस्तार से भयभीत हैं। तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को ‘पी’ और ‘डी’ शब्द सुनते ही असहजता होने लगती है। उन्होंने रेखांकित किया कि आगामी राजनीतिक परिदृश्य में सामाजिक भागीदारी और वंचित तबकों का हक सबसे बड़ा केंद्रीय विषय रहेगा। आने वाले चुनावों में सामाजिक संतुलन और हर वर्ग की वास्तविक हिस्सेदारी की मांग चुनावी विमर्श की दिशा तय करेगी।
बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल: डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी
प्रदेश के चिकित्सा ढांचे के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने बताया कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति इतनी गंभीर है कि 16,189 की आबादी पर बमुश्किल एक चिकित्सक उपलब्ध है। सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के कुल 6,872 पद (लगभग 41 प्रतिशत) खाली पड़े हैं, वहीं नर्सिंग और पैरामेडिकल संवर्ग में भी 24,000 से अधिक पद रिक्त हैं। इन बुनियादी मानव संसाधनों के अभाव के कारण आम जनता, विशेषकर ग्रामीण और निर्धन वर्ग, समुचित चिकित्सा पाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। उन्होंने घोषणा की कि सपा की सरकार बनते ही गंभीर से गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए किसी पहचान पत्र या सरकारी कार्ड की बाध्यता को पूरी तरह समाप्त कर मुफ्त चिकित्सा और औषधि की गारंटी दी जाएगी।
रक्षाबंधन पर निशुल्क बस सेवा के दावों और कानून-व्यवस्था की पोल खोली
त्योहारों के अवसर पर घोषित जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन पर बहनों के लिए घोषित मुफ्त बस यात्रा योजना केवल कागजों और बयानों तक सीमित रह गई। धरातल पर पर्याप्त बसों और आवश्यक व्यवस्थाओं की कमी के चलते महिलाओं को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल खोखली घोषणाएं करने से जनहित नहीं होता, बल्कि उसे धरातल पर लागू करने के लिए ठोस प्रबंधन जरूरी है। इसके साथ ही, हरियाणवी गायक अंकित बालियान हत्याकांड का उल्लेख करते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सरकारों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दोनों ही राज्यों में एक ही दल का शासन होने के बावजूद पीड़ित परिवार (पिता, पत्नी और भाई) को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है।
जेपीएनआईसी और सार्वजनिक संपत्तियों के व्यावसायीकरण पर कड़ा प्रहार
लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपीएनआईसी) के मुद्दे पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि इस विश्वस्तरीय स्मारक से समाजवादियों की गहरी वैचारिक और भावनात्मक आस्था जुड़ी है। लोकनायक जेपी के सम्मान में बने इस परिसर में 1,200 वाहनों की क्षमता वाली विशाल पार्किंग मौजूद है, जिसकी नियमित आय से ही संपूर्ण प्रोजेक्ट की निर्माण लागत की भरपाई की जा सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित की इस अनूठी धरोहर का व्यावसायीकरण करने पर तुली हुई है। इसके साथ ही उन्होंने बस स्टैंड और प्लासियो मॉल जैसे बुनियादी ढांचों का संदर्भ देते हुए कहा कि बहुमूल्य सार्वजनिक संपत्तियों को चुनिंदा निजी हाथों में सौंपने और अपने चहेतों को बड़े ठेके बांटने की सुनियोजित नीति चलाई जा रही है।
कई दलों के वरिष्ठ नेताओं ने थामा सपा का दामन
इस अवसर पर विपक्षी दलों में बड़ी सेंधमारी देखने को मिली। बहुजन समाज पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और एआईएमआईएम छोड़कर आए कई पूर्व विधायकों, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्षों और पूर्व ब्लॉक प्रमुखों ने अपने समर्थकों सहित समाजवादी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की। सभी नए सदस्यों का पार्टी में स्वागत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि जमीनी नेताओं के आगमन से संगठन को व्यापक मजबूती मिलेगी और पीडीए का संघर्ष और अधिक तीव्र होगा।





















































