उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन अत्यंत हंगामेदार रहा। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के संवेदनशील मुद्दे को लेकर विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) और सत्ता पक्ष के बीच तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिला। अनुपूरक बजट पर पूर्व निर्धारित चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों के जोरदार विरोध और नारेबाजी के बीच फिरोजाबाद की जसराना सीट से सपा विधायक सचिन यादव को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। सदन के भीतर पोस्टर लहराने और लगातार व्यवधान डालने पर यह कड़ी कार्रवाई की गई। निलंबन के दौरान मार्शल और विपक्षी विधायकों के बीच तीखी धक्का-मुक्की भी हुई, जिसके बाद विधानसभा की कार्यवाही को अगले दिन तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
59 हजार करोड़ से अधिक का अनुपूरक बजट पेश
सदन में जारी भारी शोर-शराबे और गतिरोध के बीच योगी सरकार ने अपना विधायी कामकाज आगे बढ़ाया। प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 59,019.54 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पटल पर रखा। सरकार निर्धारित कार्यसूची के अनुसार बजट प्रस्तावों पर आगे बढ़ने के लिए अडिग दिखी, वहीं दूसरी ओर सपा विधायक इस पूरे विषय को दरकिनार कर राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर तत्काल विस्तृत बहस कराने की मांग पर अड़े रहे।
नेता प्रतिपक्ष के वेल में उतरते ही स्थगित हुई कार्यवाही
मंगलवार को जैसे ही सत्र की शुरुआत हुई, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने राम मंदिर में हुए कथित चढ़ावा घोटाले का मुद्दा उठाया और नियम के तहत तत्काल चर्चा कराने का आग्रह किया। जब पीठ की ओर से इस विषय पर बहस की अनुमति नहीं मिली, तो सपा विधायक नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए। लगातार बढ़ते शोर-शराबे के कारण सदन के संचालन में बाधा आई, जिसके चलते विधानसभा अध्यक्ष को पहली बार कार्यवाही कुछ समय के लिए रोकनी पड़ी।
सीएम योगी ने विपक्ष की मंशा पर उठाए सवाल
दोपहर के समय जब सदन की कार्यवाही पुनः प्रारंभ हुई और वित्त मंत्री के बजट पेश करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना वक्तव्य देने के लिए खड़े हुए, तो विपक्ष ने दोबारा नारेबाजी शुरू कर दी। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि अनुपूरक बजट उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता के सर्वांगीण विकास और जनकल्याण से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एजेंडा पहले से तय था और सरकार हर मुद्दे पर सार्थक विमर्श के लिए पूरी तरह तैयार थी। मुख्यमंत्री ने अफसोस जताते हुए कहा कि विपक्ष ने लोकतांत्रिक संवाद का रास्ता चुनने के बजाय व्यवधान उत्पन्न करने को प्राथमिकता दी। उन्होंने विपक्षी आचरण को असंवैधानिक करार देते हुए आरोप लगाया कि जनता के बहुमूल्य समय और संसाधनों को नष्ट किया जा रहा है।
पोस्टर लहराने पर विधायक सचिन यादव पर गिरी गाज
मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान ही जसराना से सपा विधायक सचिन यादव विरोध प्रदर्शित करते हुए हाथ में पोस्टर लेकर लहराने लगे। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने इसे विधायी मर्यादाओं का उल्लंघन मानते हुए पहले चेतावनी दी। चेतावनी की अनदेखी करने पर अध्यक्ष ने कड़ा रुख अपनाते हुए सचिन यादव को मौजूदा मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित करने का आदेश दे दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने यह चेतावनी भी दी कि यदि भविष्य में किसी सदस्य द्वारा ऐसी अमर्यादित आचरण की पुनरावृत्ति होती है, तो विशेषाधिकार समिति के जरिए संबंधित सदस्य की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।
मार्शलों से तीखी धक्का-मुक्की और सदन स्थगित
विधानसभा अध्यक्ष के निलंबन आदेश का पालन कराने के लिए जब सुरक्षाकर्मी (मार्शल) विधायक सचिन यादव को सदन से बाहर ले जाने लगे, तो समाजवादी पार्टी के अन्य विधायक उनके बचाव में उतर आए। इस दौरान वेल के करीब मार्शलों और सपा सदस्यों के बीच जबरदस्त धक्का-मुक्की और खींचतान देखने को मिली, जिससे पूरे सदन में भारी तनाव फैल गया। स्थिति को बिगड़ता देख विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन की कार्यवाही को बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।



















































