लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण कोचिंग सेंटर अग्निकांड को लेकर सूबे की योगी सरकार पूरी तरह से संवेदनशील और एक्शन मोड में नजर आ रही है। इस दर्दनाक हादसे में अपनी जान गंवाने वाले होनहार छात्रों के प्रति गहरा शोक व्यक्त करते हुए सरकार ने पीड़ित परिवारों की हरसंभव मदद करने का संकल्प दोहराया है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस हादसे को बेहद हृदयविदारक बताते हुए साफ लफ्जों में कहा है कि इस लापरवाही के पीछे जो भी दोषी होगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार जांच रिपोर्ट के आधार पर न सिर्फ भवन स्वामियों बल्कि लापरवाही बरतने वाले प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने जा रही है।
पीड़ितों को ₹7-7 लाख की तात्कालिक राहत, सरकार पूरी तरह साथ
इस भीषण त्रासदी के बाद राज्य और केंद्र सरकार ने पीड़ित परिवारों के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि राज्य सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए सभी मृतकों के आश्रितों को तत्काल 5-5 लाख रुपये की आर्थिक मदद स्वीकृत की है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री राहत कोष की ओर से भी प्रत्येक शोकाकुल परिवार को 2-2 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि प्रदान की गई है।
ब्रजेश पाठक ने कहा कि इस असहनीय दुख की घड़ी में पूरी प्रदेश सरकार पीड़ित परिवारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी इन परिवारों को जिस किसी भी प्रकार की सहायता या मदद की आवश्यकता होगी, सरकार उसे तत्परता से पूरा करेगी। सरकार का मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि आने वाले समय में प्रदेश के किसी भी कोने में ऐसी खौफनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
“निकास मार्ग न होना दुर्भाग्यपूर्ण, दोषी अफसरों पर भी होगी कार्रवाई” — केशव प्रसाद मौर्य
हादसे पर गहरा शोक जताते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि इस अग्निकांड में 15 होनहार बच्चों की असामयिक मृत्यु ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने बताया कि घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं और फोरेंसिक से लेकर प्रशासनिक चूक तक, सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल की जा रही है।
केशव प्रसाद मौर्य ने सुरक्षा व्यवस्था पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस स्थान पर सैकड़ों की संख्या में देश का भविष्य यानी छात्र पढ़ाई कर रहे थे, वहां आपातकालीन सुरक्षित निकास मार्ग (इमरजेंसी एग्जिट) का न होना बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में यदि विकास प्राधिकरण, फायर विभाग या स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी उतनी ही कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जितनी भवन संचालकों पर हो रही है।
लखनऊ हादसे के बाद कानपुर के काकादेव में केडीए का महा-अभियान
लापरवाही की आग में झुलसी राजधानी के बाद अब पड़ोसी जिले कानपुर में भी प्रशासनिक हड़कंप मच गया है। कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने इस हादसे से सबक लेते हुए शहर के सबसे बड़े कोचिंग हब काकादेव क्षेत्र में एक व्यापक और सघन जांच अभियान शुरू कर दिया है।
सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर और बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन कर धड़ल्ले से चल रहे दर्जनों कोचिंग संस्थानों के खिलाफ केडीए की प्रवर्तन टीमों ने बड़ी कार्रवाई की है। इस औचक छापेमारी के दौरान कई असुरक्षित पाए गए कोचिंग संस्थानों को तुरंत खाली कराया गया और उन्हें सील करने की प्रक्रिया शुरू की गई। कानपुर प्रशासन ने भी यह साफ कर दिया है कि छात्रों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी व्यावसायिक या शैक्षणिक संस्थान को युवाओं की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।





















































