लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 15 मासूम जिंदगियां काल के गाल में समा गईं, जबकि 9 लोग गंभीर रूप से झुलस गए। इस संवेदनशील मामले में मुस्तैदी दिखाते हुए लखनऊ पुलिस ने चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस प्रशासन ने हादसे की तह तक जाने के लिए एक विस्तृत और गहन जांच शुरू कर दी है, ताकि लापरवाही बरतने वाले किसी भी जिम्मेदार को बख्शा न जा सके।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
यह दिल दहला देने वाली घटना सोमवार को अलीगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली पुरनिया चौकी के पास घटी। सेक्टर-डी कॉलोनी में स्थित लालबत्ती यूपीएससी भवन के ठीक पीछे बनी एक व्यावसायिक इमारत अचानक आग की लपटों में घिर गई।
देखते ही देखते पूरी इमारत में गाढ़ा और जहरीला धुआं फैल गया, जिससे वहां मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। दम घुटने और आग की चपेट में आने के कारण कई लोग अंदर ही फंस गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दहशत का माहौल ऐसा था कि कुछ लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए इमारत की ऊपरी मंजिलों से नीचे छलांग लगा दी, जिसके कारण वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटीं केंद्रीय और प्रांतीय टीमें
हादसे की भयावहता को देखते हुए लखनऊ के पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था), संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय), पुलिस उपायुक्त (उत्तरी) और सहायक पुलिस आयुक्त (अलीगंज) समेत भारी पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा।
राहत और बचाव कार्य को गति देने के लिए स्थानीय फायर सर्विस के साथ-साथ राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (NDRF) की टीमों को संयुक्त मोर्चे पर लगाया गया। रेस्क्यू टीमों ने मलबे और धुएं के बीच से घायलों और फंसे हुए नागरिकों को बाहर निकाला। सभी प्रभावितों को तुरंत किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की विशेष टीम उनका इलाज कर रही है।
इन चार रसूखदारों पर कसा पुलिस का शिकंजा
हादसे के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अब तक चार मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल हैं:
- वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला – भवन (इमारत) का मुख्य मालिक
- तुषांक कृष्ण जायसवाल – गेमिंग जोन का संचालक और डायरेक्टर
- सुरेश कुमार साहू – इमारत में आईटी नेटवर्किंग का कार्य देखने वाला जिम्मेदार
- राम कृष्ण उपाध्याय – परिसर में संचालित पेटशॉप (Pet Shop) का मालिक
फायर एनओसी और सुरक्षा मानकों की होगी स्क्रूटनी
लखनऊ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों से पुलिस लाइंस और थाने में कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। जांच टीम इस बात का पता लगा रही है कि क्या इस बहुमंजिला इमारत के पास वैध फायर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (फायर NOC) था या नहीं। इसके साथ ही, भवन निर्माण की वैधानिक अनुमतियां, आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था और अग्नि सुरक्षा उपकरणों की कार्यशीलता की भी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस लापरवाही में शामिल अन्य चेहरों को भी जल्द ही बेनकाब कर गिरफ्तार किया जाएगा।





















































