लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में सोमवार को एक व्यावसायिक इमारत में भड़की भीषण आग ने कई हंसते-खेलते परिवारों को ताउम्र का दर्द दे दिया है। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे में 15 मासूम और होनहार युवाओं की असामयिक मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। अपनों को हमेशा के लिए खो चुके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद सामने आ रही कहानियां और परिजनों का छलकता दर्द न केवल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि इस त्रासदी के पीछे छिपी बड़ी लापरवाहियों को भी उजागर कर रहा है। मृतकों में शामिल 28 वर्षीय संयम विज और 25 वर्षीय सूरजभान सिंह के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
दादी के शोक में शामिल होने घर आने वाले थे संयम, रास्ते में ही मिली मौत की खबर
हादसे का शिकार हुए एनीमेशन प्रोफेशनल संयम विज के मामा गौरव ने अत्यंत भावुक मन से बताया कि उनके परिवार को इस अनहोनी की भनक सोमवार रात करीब 8:30 से 9:00 बजे के बीच लगी। उन्होंने कहा, “संयम के एक दोस्त ने फोन कर उसकी मां को इस भयावह हादसे की जानकारी दी। खबर सुनते ही हमारे पैरों तले जमीन खिसक गई और हम तुरंत कार उठाकर लखनऊ के लिए रवाना हो गए।”
गौरव ने रूंधे गले से बताया कि संयम पिछले पांच साल से एनीमेशन के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे थे और हर वीकेंड पर अपने घर आया करते थे। परिवार में पहले से ही संयम की दादी के निधन का शोक चल रहा था और वह इसी सिलसिले में कल घर वापस आने वाले थे, लेकिन किसे पता था कि घर आने से पहले ही वह मौत के आगोश में सो जाएंगे।
“न सीढ़ियां थीं, न इमरजेंसी एग्जिट”—सुरक्षा मानकों पर परिजनों का फूटा गुस्सा
पीड़ित परिवार के अन्य सदस्यों ने इस पूरी त्रासदी के लिए सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र और इमारत प्रबंधन की घोर लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। परिजनों का आरोप है कि इस व्यावसायिक इमारत को बिना किसी पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के धड़ल्ले से चलाया जा रहा था।
एक रिश्तेदार ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, “बिल्डिंग की बनावट ऐसी थी कि आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता (इमरजेंसी एग्जिट) मौजूद नहीं था। सीढ़ियों का इंतजाम भी बेहद संकरा और घटिया था। सवाल यह उठता है कि प्रशासन ने ऐसी मौत की कोठरी को संचालित करने की अनुमति आखिर दी कैसे?”
सूरजभान के भाई सुधीर बोले—”शॉर्ट सर्किट की बात सामने आ रही है, पर पूरी सच्चाई छिपी है”
एनीमेशन कंपनी में ही काम करने वाले एक अन्य मृतक सूरजभान सिंह के भाई सुधीर भी इस सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। सुधीर ने बताया कि उनका परिवार अभी भी इस दर्दनाक हादसे से जुड़ी कड़ियों को जोड़ने और सच्चाई जानने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, “हमें प्राथमिक तौर पर यह बताया गया है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी थी, लेकिन अभी तक हमारे पास कोई पुख्ता और आधिकारिक जानकारी नहीं पहुंची है। हम बस अपने भाई को खोने के गम में डूबे हैं।”
20 से 24 साल के युवा बने काल का ग्रास, केजीएमयू में घायलों का इलाज जारी
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस अग्निकांड में जान गंवाने वाले सभी 15 मृतकों की शिनाख्त की जा चुकी है। मरने वालों में अधिकांश युवा हैं जिनकी उम्र महज 20 से 24 वर्ष के बीच थी। मृतकों की सूची इस प्रकार है:
- शाहजान, सुखमनी सिंह, आदित्य श्रीवास्तव, ज्वानिल चक्रवर्ती
- सागर पंत, निलेश, संयम, भविष्य, ज्योति, अब्दुल रहमान
- अनामिका सामंत, सूरज सिंह, मोहम्मद अम्मार, तीजराज
- सोमाल्या (निवासी: दक्षिण 24 परगना, पश्चिम बंगाल)
इस हादसे में गंभीर रूप से झुलसे लवप्रीत और जयंत का इलाज लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी जान बचाने की हरसंभव कोशिश कर रही है।
छह नामजद आरोपियों पर बीएनएस के तहत केस, चार रसूखदार गिरफ्तार
इस वीभत्स घटना के बाद हरकत में आई लखनऊ पुलिस ने अलीगंज थाने में इमारत के मालिकों और प्रबंधन से जुड़े जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 105, 110, 125 और 3(5) के तहत कुल छह नामजद आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस की तफ्तीश मुख्य रूप से अग्नि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन, अवैध निर्माण और फायर एनओसी की अनुपलब्धता पर केंद्रित है। कार्रवाई के तहत अब तक चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें इमारत के मालिक रामकृष्ण उपाध्याय और वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, गेमिंग जोन संचालक तुषांक कृष्ण जायसवाल और स्टूडियो संचालक सुरेश कुमार साहू शामिल हैं। पुलिस अन्य फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश कर रही है।





















































