लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती व्यवस्थाओं पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य में लंबे समय तक एक व्यक्ति और एक परिवार की सियासी गलतियों की भारी कीमत पूरे प्रदेश को चुकानी पड़ी। इसी कुप्रबंधन के चलते कभी उत्तर प्रदेश गंभीर पहचान संकट, चरमराई कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक अराजकता तथा संस्थागत भ्रष्टाचार के भंवर में फंसा रहा। रविवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के छठे स्थापना दिवस समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब वह दौर बीत चुका है। आज शुचिता और पारदर्शी कार्यशैली के दम पर उत्तर प्रदेश देश-दुनिया में अपनी नई पहचान बना चुका है, जिससे प्रदेशवासी हर जगह गर्व से अपना परिचय दे सकते हैं।
भर्ती प्रक्रिया में शुचिता से 9.5 लाख युवाओं को मिला पारदर्शी रोजगार
मुख्यमंत्री ने भर्ती और नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यदि किसी संस्था की चयन प्रक्रिया में भेदभाव या भ्रष्टाचार होता है, तो उसका गंभीर दुष्परिणाम पूरे सिस्टम को झेलना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष चयन ही किसी संस्थान के प्रभावी परिणामों की गारंटी होता है। पिछले साढ़े नौ वर्षों के कार्यकाल का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार ने साढ़े नौ लाख युवाओं को बिना किसी लेन-देन और बिना किसी भेदभाव के पूरी पारदर्शिता के साथ सरकारी नौकरियों में नियुक्त किया है। राज्य के कुल लगभग 16 लाख सरकारी कर्मचारियों में से 9.5 लाख से अधिक कार्मिक मौजूदा सरकार के दौर में चयनित हुए हैं, और यह युवा शक्ति प्रदेश की प्रगति की वाहक बनी है।
लोहिया संस्थान को अत्याधुनिक सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं का उपहार
स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने संस्थान में आधुनिक मुख्य चिकित्सा अंग प्रत्यारोपण इकाई (ऑर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट) सहित कई उन्नत जीवनरक्षक सुविधाओं का लोकार्पण किया। इन नई सुविधाओं में 40 बेड का सर्वसुविधायुक्त आपातकालीन वार्ड, मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में 100 तीमारदारों के बैठने की क्षमता वाला प्रतीक्षालय, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विंग में 4डी-सीटी सिम्युलेटर, पेट-सीटी, स्पेक्ट-सीटी मशीन, 1.5 टेस्ला क्षमता की एमआरआई मशीन और पीएमआर विभाग में आधुनिक नेविगेटेड आरटीएमएस मशीन शामिल हैं। सीएम ने संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट का विमोचन करते हुए उम्मीद जताई कि अंग प्रत्यारोपण इकाई के संचालन से गुर्दा प्रत्यारोपण (किडनी ट्रांसप्लांट) के लिए मरीजों की लंबी प्रतीक्षा सूची घटेगी। इसके साथ ही जल्द ही बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा भी शुरू की जाएगी।
20 बेड के स्वास्थ्य केंद्र से 1,400 बेड के सुपर स्पेशियलिटी हब तक का सफर
सीएम योगी ने संस्थान के विकास क्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2017 में यह संशय बना हुआ था कि यह परिसर अस्पताल रहेगा या इसे एक स्वायत्त संस्थान के रूप में विकसित किया जाए। सरकार ने दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाते हुए इसे सुपर स्पेशियलिटी संस्थान का रूप दिया। जो संस्थान कभी मात्र 20 बिस्तरों वाले सामान्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में अस्तित्व में आया था, वह वर्तमान में 1,400 बिस्तरों वाले विशाल संस्थान में बदल चुका है। पहले जहां अखबारों में अव्यवस्थाओं की खबरें छपती थीं, वहीं आज जनता की संतुष्टि इस संस्थान की सबसे बड़ी पूंजी है। आने वाले समय में संस्थान परिसर में 1,010 बिस्तरों का एक नया अस्पताल ब्लॉक और 350 बिस्तरों का ट्रॉमा सेंटर भी स्थापित किया जाएगा।
स्वास्थ्य अवसंरचना का विस्तार: 41 से बढ़कर 85 हुए मेडिकल कॉलेज
प्रदेश में मेडिकल ढांचे की मजबूती के आंकड़े साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 से पहले समूचे यूपी में सरकारी और निजी मिलाकर कुल 41 मेडिकल कॉलेज थे, जिनकी संख्या आज बढ़कर 85 तक पहुंच चुकी है, साथ ही दो एम्स पूरी क्षमता से कार्यरत हैं। राज्य में एमबीबीएस सीटों की क्षमता 4,690 से बढ़ाकर 13,600 से अधिक की गई है, जबकि पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) सीटें 3,564 से बढ़कर 5,067 हो चुकी हैं। इसके अलावा नर्सिंग कॉलेजों की संख्या 2 से बढ़कर 26 हो गई है और 33 अन्य पर निर्माण कार्य जारी है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की संख्या भी 1,227 से बढ़ाकर 3,438 कर दी गई है। प्रदेश के सभी 75 जिला चिकित्सालयों में 10-10 बिस्तरों पर निशुल्क डायलिसिस सेवा सक्रिय है। आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना तथा राहत कोष से अब इलाज के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध है, इसलिए मुख्य चुनौती मरीजों की लंबी वेटिंग लिस्ट को समाप्त करने की है।
पूर्ववर्ती सरकारों की उदासीनता और मेडिकल डाटा संरक्षण का आह्वान
अतीत की प्रशासनिक लापरवाही पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने शुरुआती चरण में ही यूपी के लिए 17 मेडिकल कॉलेज और गोरखपुर एम्स की स्वीकृति दे दी थी, लेकिन तत्कालीन राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेज लेने से मना कर दिया और गोरखपुर एम्स के लिए सुप्रीम कोर्ट से स्टे वाली विवादित जमीन सौंप दी। 2017 में नई सरकार आने के बाद नई भूमि देकर गोरखपुर एम्स का निर्माण पूरा कराया गया और रायबरेली एम्स की रुकावटों को भी दूर किया गया। सीएम योगी ने भारतीय चिकित्सा डाटा के संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि विदेशी संस्थाएं हमारे डाटा पर रिसर्च करती हैं, इसलिए हमें स्वदेशी डाटा सुरक्षित कर अपनी परिस्थितियों के अनुकूल स्वास्थ्य तकनीक विकसित करनी होगी। इसके लिए मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, फार्मा पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
शोध, नवाचार और सेवा: भविष्य के नोबेल का सपना
कार्यक्रम में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लोहिया संस्थान के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान में जारी शोध की गुणवत्ता को देखते हुए यह विश्वास जगता है कि यहां से चिकित्सा क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार भी निकल सकता है। उन्होंने चिकित्सकों से संवेदनशीलता और कौशल के साथ रोगियों के उपचार का आह्वान किया। साथ ही, चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में जो क्रांतिकारी विस्तार हुआ है, लोहिया संस्थान का 1,400 बिस्तरों तक का सफर उसी प्रगतिशील सोच का प्रत्यक्ष प्रमाण है।





















































