लखनऊ। उत्तर प्रदेश की धरती अब युवा उद्यमियों के नए विचारों और व्यावसायिक नवाचारों से महक रही है। राज्य के युवाओं को उद्यमशीलता की दिशा में प्रेरित करने और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से मंगलवार को राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) में भव्य ‘यू.पी. स्टार्टअप संवाद 3.0’ का आयोजन किया गया। इस महामंथन में प्रदेश और देश भर से 100 से अधिक उभरते हुए स्टार्टअप्स, 50 से ज्यादा प्रतिष्ठित इनक्यूबेशन सेंटर्स और अग्रणी वेंचर कैपिटल निवेशकों ने सहभागिता की। इस विशेष सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य राज्य के होनहार उद्यमियों के लिए 15 करोड़ रुपये से अधिक की निवेश पाइपलाइन तैयार कर उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना रहा।
युवा ऊर्जा से ही संभव है आर्थिक और सामाजिक बदलाव
समारोह की मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी को केवल आजीविका की तलाश में भटकने के बजाय दूसरों को अवसर प्रदान करने वाला ‘जॉब क्रिएटर’ बनना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्यम स्थापित करना केवल लाभ कमाने का साधन नहीं है, बल्कि समाज के बुनियादी संकटों की पहचान कर उनका तकनीकी और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करना ही वास्तविक नवाचार है। राज्यपाल ने विश्वास जताया कि यदि युवाओं के पास अपनी मेधा, डिजिटल दक्षता और दूरदर्शिता पर अडिग भरोसा हो, तो हर समस्या एक बड़े आर्थिक अवसर में तब्दील हो सकती है। उन्होंने विशेष रूप से जल संरक्षण, आधुनिक कृषि, जनस्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण सशक्तिकरण से जुड़े क्षेत्रों में क्रांतिकारी विचार विकसित करने का आह्वान किया।
सफलता के 5 मजबूत स्तंभ और पेटेंट की अहमियत
राज्यपाल ने अपने संबोधन में स्टार्टअप्स के संचालन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी उद्यम की सफलता केवल वित्तीय पूंजी या बाहरी निवेश (फंडिंग) पर निर्भर नहीं करती। इसके लिए पांच प्रमुख स्तंभों का सुदृढ़ होना अनिवार्य है—यथार्थवादी समस्या की पहचान, उसका सटीक निवारण, समर्पित व कुशल टीम, अनुभवी मेंटर्स का मार्गदर्शन और जमीनी बाजार की गहरी समझ। जब ये पांचों पहलू मजबूत होते हैं, तो पूंजी की राह में कभी कोई बाधा नहीं आती। इसके साथ ही उन्होंने सभी युवा शोधकर्ताओं और नवाचारियों से आग्रह किया कि वे अपने मौलिक विचारों को बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) और पेटेंट के जरिए सुरक्षित करें, ताकि उनके बौद्धिक परिश्रम का कोई अनधिकृत लाभ न उठा सके।
एकेटीयू का 100 करोड़ का इनोवेशन फंड और इनक्यूबेशन नेटवर्क का विस्तार
तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के बढ़ते कदमों की जानकारी देते हुए राज्यपाल ने बताया कि वर्ष 2021 में एकेटीयू ने 23 करोड़ रुपये की लागत से 15 संबद्ध संस्थानों में इनक्यूबेशन केंद्रों की नींव रखी थी। वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 33 हो चुकी है, जहां 1,400 से भी अधिक नवाचारी स्टार्टअप्स को प्रत्यक्ष मार्गदर्शन और संसाधन दिए जा रहे हैं। जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को अवसर देने के लिए ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन इनक्यूबेटर’ अभियान के तहत बीते दो सालों में 82 नि:शुल्क इनक्यूबेशन केंद्र क्रियान्वित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, एकेटीयू द्वारा स्थापित 100 करोड़ रुपये का ‘इनोवेशन फंड’ प्रयोगशालाओं में होने वाले उच्चस्तरीय अनुसंधानों को सीधे वाणिज्यिक बाजार से जोड़ने में एक मजबूत सेतु साबित हो रहा है।
नीतियों का विमोचन, डिजिटल पोर्टल और इन्वेस्टर्स नेटवर्क की घोषणा
इस गरिमामयी अवसर पर राज्य के उद्यमशीलता ढांचे को नई ऊंचाई देने के लिए कई युगांतकारी कदम उठाए गए। कार्यक्रम में ‘कलाम पेटेंट सेंटर’ का भव्य लोकार्पण किया गया, जिससे तकनीकी शोधकर्ताओं को पेटेंट पंजीकरण में सहूलियत मिलेगी। साथ ही अकादमिक समुदाय को नवाचार से जोड़ने के लिए ‘स्टूडेंट एंड फैकल्टी इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप पॉलिसी 2026-2031’ का आधिकारिक विमोचन हुआ। उद्यमियों को डिजिटल मंच प्रदान करने हेतु ‘इनोवेशन हब यूपी पोर्टल’ का शुभारंभ हुआ और पूंजी प्रवाह को गति देने के लिए ‘उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर्स नेटवर्क’ की स्थापना की गई। इस दौरान शैक्षणिक संस्थानों और औद्योगिक निकायों के मध्य कई ऐतिहासिक सहमति पत्रों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर यूपी के युवा
समारोह के समापन चरण में राज्यपाल ने ‘स्टार्टअप एवं इनक्यूबेटर एक्सपो’ का फीता काटकर उद्घाटन किया और विभिन्न स्टॉल्स पर जाकर युवा उद्यमियों के अनूठे उत्पादों व तकनीकी मॉडल्स का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि जब राज्य सरकार, अकादमिक संस्थान, निजी उद्योग और निवेशक एक सामूहिक लक्ष्य के साथ काम करेंगे, तो उत्तर प्रदेश का युवा वर्ग न केवल देश की आंतरिक जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि समूचे विश्व की जटिल चुनौतियों का समाधान करने वाले अंतरराष्ट्रीय नवाचार-नेता (इनोवेशन लीडर) के रूप में उभरेगा।





















































