वाराणसी में नगर निगम का बड़ा अभियान, करोड़ों की सरकारी संपत्ति हुई मुक्त
वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे करने वालों के खिलाफ नगर निगम का अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में सोमवार को ककरमत्ता क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई की गई, जिसमें करीब एक बीघा सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया गया। बाजार भाव के अनुसार इस भूमि की कीमत लगभग 100 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस कार्रवाई के साथ ही 38 वर्षों से चली आ रही एक जटिल भूमि विवाद की कानूनी प्रक्रिया भी समाप्त हो गई, जिससे भू-माफिया में हड़कंप मच गया है।
1988 से चला आ रहा था कानूनी संघर्ष
नगर निगम के अनुसार, यह मामला मौजा ककरमत्ता (परगना देहात अमानत) की अराजी संख्या 411 से जुड़ा है। इस भूमि को लेकर वर्ष 1988 में रामनरायन नामक व्यक्ति ने उत्तर प्रदेश सरकार सहित अन्य पक्षकारों के खिलाफ भूमिधरी अधिकार का दावा पेश किया था। उसका कहना था कि उसके दादा 1356 और 1359 के फसली वर्षों से इस जमीन पर काबिज थे, इसलिए उन्हें स्थायी भूमिधर घोषित किया जाए। इस मामले में विभिन्न अदालतों में लंबी सुनवाई और अपीलों का सिलसिला चलता रहा, लेकिन अब अदालत ने इस बहुआयामी विवाद का अंत कर दिया।
पोखरी और तालाब की सुरक्षा का कानून बना बड़ा आधार
अतिरिक्त उपजिलाधिकारी (सदर) प्रज्ञा सिंह की अदालत ने वाद संख्या 1987/2025 की सुनवाई के दौरान संपूर्ण पत्रावली और राजस्व अभिलेखों की गहन समीक्षा की। अदालत ने पाया कि फसली वर्ष 1356 और 1359 के खसरे के कॉलम-8 में ‘सिंघाड़ा’ तथा कॉलम-19 में ‘पोखरी’ का उल्लेख है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि यह भूमि मूलतः पोखरी थी, जो सार्वजनिक उपयोग की श्रेणी में आती है। उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 की धारा 132 के अनुसार, पोखरी और तालाबों को सार्वजनिक भूमि माना गया है।
कोर्ट का सख्त फैसला, अवैध दावे पर लगाम
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि धारा 132 के तहत सार्वजनिक उपयोग की पोखरी भूमि पर किसी भी असामी (काश्तकार) को पांच वर्ष से अधिक अवधि का पट्टा नहीं दिया जा सकता है और न ही उसे संक्रमणीय भूमिधर घोषित किया जा सकता है। इस आधार पर अदालत ने वादी रामनरायन के दावे को पूरी तरह निरस्त कर दिया और अराजी संख्या 411 से संबंधित सभी खातों के नाम रद्द करने का आदेश दिया। साथ ही, राजस्व अभिलेखों में इस भूमि को पुनः पोखरी के रूप में दर्ज करने के निर्देश दिए गए।
तीन जेसीबी मशीनों से हटाया गया अवैध कब्जा
न्यायालय के आदेश के बाद महापौर अशोक कुमार तिवारी के निर्देश पर सहायक नगर आयुक्त अनिल यादव के नेतृत्व में नगर निगम की राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर कार्रवाई की। भू-माफिया द्वारा कूड़े से पाट दिए गए इस तालाब की खुदाई के लिए तीन जेसीबी मशीनें लगाई गईं, ताकि पोखरे को उसके मूल स्वरूप में पुनर्स्थापित किया जा सके। नगर निगम ने स्पष्ट किया कि इस कब्जामुक्त भूमि पर स्थित पोखरे का पुनरुद्धार और सौंदर्यीकरण कराया जाएगा।
पर्यावरण और भू-गर्भ जलस्तर पर सकारात्मक प्रभाव
नगर निगम का कहना है कि इस पोखरे के पुनरुद्धार से वाराणसी शहर के भू-गर्भ जलस्तर में सुधार होगा, जो पानी की बढ़ती कमी को देखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, तालाबों का संरक्षण पर्यावरण संतुलन को भी मजबूती प्रदान करता है। नगर निगम ने भविष्य में भी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रखने की बात कही है, ताकि अतिक्रमणकारियों को सख्त संदेश दिया जा सके और शहर की बहुमूल्य संपत्तियों को संरक्षित रखा जा सके।





















































