उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के नोएडा में बेरोजगार युवाओं को प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी दिलाने का सब्जबाग दिखाकर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। नोएडा पुलिस के सेक्टर-20 थाने की टीम और साइबर सेल द्वारा की गई संयुक्त कार्रवाई के दौरान चार महिलाओं समेत कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह शातिर गिरोह सुनियोजित तरीके से भोले-भाले नौजवानों को अपने जाल में फंसाकर उनसे रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर अवैध वसूली कर रहा था। पुलिस की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई से नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले असामाजिक तत्वों में हड़कंप मच गया है।
अट्टा मार्केट में चल रहा था फर्जीवाड़ा, ऐसे हुआ खुलासा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूरा मामला 27 जुलाई का है जब नोएडा जोन की साइबर टीम और थाना सेक्टर-20 पुलिस को एक पीड़ित युवा से इस फर्जीवाड़े की गुप्त सूचना मिली। सूचना के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सेक्टर-27 स्थित अट्टा मार्केट की एक व्यावसायिक इमारत में औचक छापेमारी की।
इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से संलिप्त सभी छह आरोपियों को धर दबोचा। शुरुआती पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने इन सभी को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान श्वेता सिंह उर्फ प्रिया (निवासी उन्नाव), नीजू यादव (निवासी सेक्टर-22, नोएडा), कीर्ति सिंह उर्फ मीरा (निवासी न्यू अशोक नगर, दिल्ली), पूजा (निवासी अशोक नगर, दिल्ली), रूपेश कुमार (निवासी चौड़ा गांव, सेक्टर-22, नोएडा) और आमीर राणा (निवासी पिलखुआ, जनपद हापुड़) के रूप में हुई है।
भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और उपकरण बरामद
पुलिस ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से ठगी के इस काले कारोबार से जुड़े कई अहम सबूत बरामद किए हैं। इनमें मुख्य रूप से तीन एंड्रॉइड मोबाइल फोन, 11 फीस बुक, चार रसीद बुक, 22 प्रचार-प्रसार से जुड़े पंपलेट तथा विभिन्न कंपनियों में भर्ती के लिए भरे गए 20 फर्जी फॉर्म शामिल हैं।
जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी युवाओं का विश्वास जीतने के लिए इन रसीद बुकों और फीस बुकों का इस्तेमाल करते थे, जिससे किसी को भी उन पर शक न हो। प्रचार सामग्री के जरिए वे बेरोजगार युवाओं को अपनी और आकर्षित करते थे और उन्हें मोटी सैलरी का झांसा देकर आसानी से अपना शिकार बना लेते थे।
क्या था ठगी का पूरा तरीका और आगे की जांच?
यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था। आरोपी बेरोजगार युवाओं को लुभावने विज्ञापनों और सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क करते थे और उन्हें देश की जानी-मानी कंपनियों में बेहतरीन पदों पर नौकरी लगवाने का झूठा भरोसा देते थे। एक बार जब युवा उनके झांसे में आ जाते थे, तो उनसे रजिस्ट्रेशन फीस, फाइल चार्ज, प्रोसेसिंग फीस और ट्रेनिंग के नाम पर हजारों रुपए ऐंठ लिए जाते थे। पैसे मिलने के बाद आरोपी या तो अपना संपर्क काट लेते थे या टालमटोल करने लगते थे।
थाना सेक्टर-20 में सभी आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से छल करने से संबंधित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के मोबाइल फोन और जप्त किए गए दस्तावेजों की फॉरेंसिक व तकनीकी जांच की जा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस गिरोह ने अब तक कितने युवाओं को ठगा है और इस नेटवर्क के तार अन्य किन-किन जगहों से जुड़े हुए हैं।
पुलिस की चेतावनी: सतर्क रहें, बिना सत्यापन न दें पैसे
इस घटना के बाद नोएडा पुलिस ने देश के युवाओं और नौकरी की तलाश कर रहे प्रबुद्ध जनों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने स्पष्ट तौर पर अपील की है कि किसी भी निजी प्लेसमेंट एजेंसी या कंपनी में नौकरी पाने के नाम पर बिना पूरी जांच-पड़ताल किए किसी भी व्यक्ति या संस्था को पैसे न दें।
नौकरी के लिए आवेदन करने से पहले हमेशा संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट, उसके वास्तविक कार्यालय और उसकी रिक्रूटमेंट पॉलिसी की सत्यता की पुष्टि अवश्य कर लें। यदि कोई व्यक्ति रोजगार दिलाने के एवज में अग्रिम धनराशि (कैश या ऑनलाइन) की मांग करता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और इसकी सूचना स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन नंबर पर दें, ताकि समय रहते ऐसे ठगों की गतिविधियों पर विराम लगाया जा सके।





















































