सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के करेंसी चेस्ट से संचालित हो रहे बहुचर्चित जाली नोट रैकेट की परतें अब तेजी से खुलने लगी हैं। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने इस पूरे षड्यंत्र में शामिल दो और प्रमुख आरोपियों को धर दबोचा है। पकड़े गए व्यक्तियों की पहचान स्थानीय निवासी मुकेश कुमार और राजेंद्र कुमार के रूप में की गई है। वित्तीय तंत्र में सेंधमारी कर करोड़ों रुपये के नकली नोट खपाने की इस संगठित साजिश पर केंद्रीय जांच एजेंसी लगातार कानूनी फंदा कस रही है।
मुख्य साजिशकर्ता आदेश चौधरी से जुड़े तार
जांच एजेंसी के आधिकारिक बयान के मुताबिक, गिरफ्त में आए मुकेश और राजेंद्र कुमार इस प्रकरण के मुख्य आरोपी आदेश चौधरी के बेहद करीबी सहयोगी हैं। जांच में सामने आया है कि सहारनपुर के सिविल लाइंस स्थित पीएनबी करेंसी चेस्ट के माध्यम से जाली मुद्रा को बाजार में उतारने और इस पूरे काले नेटवर्क को व्यवस्थित करने की आपराधिक साजिश में इन दोनों की सक्रिय और केंद्रीय भूमिका थी। आदेश चौधरी के संपर्कों और गतिविधियों की गहन पड़ताल के बाद ही जांच एजेंसी इन दोनों तक पहुंचने में कामयाब रही।
करेंसी चेस्ट से बरामद हुए थे 17.29 करोड़ के नकली नोट
इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ 29 अगस्त को हुआ था, जब सहारनपुर के सदर बाजार थाने को सिविल लाइंस स्थित पीएनबी की शाखा से संबंधित एक बेहद पुख्ता खुफिया इनपुट मिला। बैंक के करेंसी चेस्ट की जांच-पड़ताल के दौरान 17.29 करोड़ रुपये की भारी-भरकम जाली भारतीय मुद्रा (एफआईसीएन) बरामद की गई। बैंक के मुख्य खजाने से इतनी बड़ी तादाद में नकली नोटों की मौजूदगी सामने आने के बाद प्रशासनिक और बैंकिंग हलकों में हड़कंप मच गया था।
बैंक कर्मियों की संलिप्तता और निलंबन की गाज
प्रारंभिक विभागीय और पुलिस जांच में यह स्पष्ट हो गया कि बैंक के भीतर से सहयोग मिले बिना इतनी बड़ी खेप को चेस्ट में रखना संभव नहीं था। मामले में बैंक के तीन कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका खुलकर सामने आई, जिसके तुरंत बाद प्रबंधन ने कड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए तीनों कर्मियों को निलंबित कर दिया। वित्तीय संस्थान की साख और सुरक्षा तंत्र को भेदने वाले इस गिरोह के अंतरराज्यीय और गहरे संपर्कों को देखते हुए मामले की गंभीरता कई गुना बढ़ गई।
यूपी पुलिस से एनआईए तक: कार्रवाई का घटनाक्रम
स्थानीय सदर बाजार थाने में 29 अगस्त को इस बाबत पहली प्राथमिकी दर्ज हुई थी। मामले की संवेदनशीलता, आर्थिक सुरक्षा पर खतरे और व्यापक नेटवर्क को देखते हुए केंद्र सरकार के निर्देश पर 3 सितंबर को एनआईए ने इस प्रकरण को दोबारा दर्ज कर जांच अपने हाथों में ली। केंद्रीय एजेंसी ने तेजी दिखाते हुए प्राथमिकी में नामजद आरोपी अमित कुमार को 7 सितंबर और मुख्य आरोपी आदेश चौधरी को 15 सितंबर को गिरफ्तार कर हिरासत में लिया था। अब मुकेश और राजेंद्र की गिरफ्तारी के साथ इस नेटवर्क की वित्तीय कड़ियों को पूरी तरह बेनकाब करने की दिशा में एजेंसी आगे बढ़ रही है।




















































