उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में उस वक्त हड़कंप मच गया जब न्यायिक हिरासत में चल रहा एक शातिर अपराधी पुलिस को चकमा देकर अदालत परिसर से फरार हो गया। सबसे हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर सुरक्षा चूक की जानकारी संबंधित पुलिसकर्मियों ने उच्चाधिकारियों से पूरे तीन दिनों तक छिपाई रखी और अपने स्तर पर तलाश का नाटक करते रहे। मामले की भनक लगते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने त्वरित और सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है और ड्यूटी में गंभीर लापरवाही बरतने वाले कुल आठ पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
अदालत परिसर से कैसे चकमा देकर भागा बंदी?
पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह सनसनीखेज घटना बीते 21 अक्टूबर की है। सुभाषनगर थाना क्षेत्र के रहने वाले सचिन सिंह ठाकुर नामक बंदी को जिला कारागार से भारी सुरक्षा के बीच अदालत में पेशी के लिए लाया गया था। कचहरी परिसर में स्थित पुलिस हाजत और पेशी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए सचिन पुलिस हिरासत से रफूचक्कर हो गया। जिस वक्त यह घटना हुई, उस समय अदालत परिसर में काफी भीड़भाड़ रहती है, जिसका फायदा उठाकर आरोपी ने अपनी भागने की योजना को अंजाम दिया।
तीन दिनों तक अधिकारियों से छिपाई गई घटना की जानकारी
यह पूरा प्रकरण इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि किस तरह से कुछ पुलिसकर्मी अपनी लापरवाही पर पर्दा डालने की कोशिश करते हैं। बंदी के फरार होने के बाद संबंधित पुलिस दल ने इस बात की सूचना तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को देने के बजाय मामले को अपने स्तर पर ही दबाए रखा। वे पिछले तीन दिनों तक लगातार अपनी नाकामी छुपाते हुए उसकी तलाश में जुटे रहे। हालांकि, जब इस उच्चस्तरीय लापरवाही की भनक एसएसपी अनुराग आर्य तक पहुंची, तो उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लिया और शनिवार को सख्त प्रशासनिक कार्रवाई का डंडा चलाते हुए सभी आठ लापरवाह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया।
कोतवाली थाने में दर्ज हुआ मुकदमा, गिरफ्तारी के लिए एसओजी सक्रिय
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय कोतवाली थाने में फरार बंदी सचिन सिंह ठाकुर के साथ-साथ उसकी कस्टडी में तैनात रहे उन सभी आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी आधिकारिक रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। विभागीय जांच के साथ-साथ कानूनी शिकंजा भी कसना शुरू हो गया है। पुलिस प्रशासन ने फरार अपराधी को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए युद्ध स्तर पर अभियान शुरू कर दिया है।
इस हाई-प्रोफाइलफरारी के बाद अपराधियों की धरपकड़ के लिए कुल चार विशेष टीमों का गठन किया गया है। इनमें एसओजी (SOG) टीम के अलावा, सर्विलांस विंग, कोतवाली थाना पुलिस और सुभाषनगर थाना पुलिस को संयुक्त रूप से लगाया गया है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि आरोपी के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया जाएगा।















































