देशभर के सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले एक गंभीर खेल पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) द्वारा जारी किए गए ताजा और कड़े निर्देशों के अनुसार, अब किसी भी अस्पताल में सिंगल-यूज (एक बार इस्तेमाल होने वाले) मेडिकल डिवाइस और डिस्पोजेबल सर्जिकल सामान का दोबारा उपयोग नहीं किया जा सकेगा। सरकार के संज्ञान में यह बात आई थी कि कई प्रतिष्ठित कॉरपोरेट और निजी अस्पताल मरीजों की सुरक्षा को ताक पर रखकर इन उपकरणों को दोबारा स्टरलाइज कर रहे हैं और सबसे हैरानी की बात यह है कि इसके बावजूद मरीजों से नए उपकरणों जैसी पूरी भारी-भरकम कीमत वसूली जा रही थी।
गंभीर बीमारियों और संक्रमण का बढ़ता खतरा
स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले महानिदेशालय ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि यह खतरनाक चलन विशेष रूप से कार्डियोलॉजी (हृदय रोग), नेफ्रोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, न्यूरोसर्जरी और वैस्कुलर सर्जरी जैसी बेहद संवेदनशील चिकित्सा शाखाओं में धड़ल्ले से चल रहा है। एक बार उपयोग के लिए बने उपकरणों को दोबारा काम में लेने से न सिर्फ उपकरणों की कार्यक्षमता और गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि मरीजों में जानलेवा संक्रमण फैलने का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, री-साइकिल या री-स्टरलाइज किए गए इन उत्पादों के कारण मरीजों को हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, एचआईवी और खतरनाक बैक्टीरियल इंफेक्शन जैसी गंभीर बीमारियां अपनी चपेट में ले सकती हैं, जिससे इलाज की प्रक्रिया और अधिक जटिल हो जाती है।
कानूनी नियमों का सीधा उल्लंघन और प्रशासनिक कार्रवाई
सरकार द्वारा उठाए गए इस कड़े कदम के पीछे केवल मरीजों की सेहत की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि मौजूदा कानूनों का हो रहा खुला उल्लंघन भी एक बड़ा कारण है। डीजीएचएस ने स्पष्ट किया है कि सिंगल-यूज उपकरणों का दोबारा इस्तेमाल औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940, चिकित्सा उपकरण नियम 2017, क्लिनिकल प्रतिष्ठान अधिनियम 2010 और बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के प्रावधानों के पूरी तरह खिलाफ है। इन नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले स्वास्थ्य संस्थानों पर अब प्रशासन का शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त आदेश
इस मनमानी पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनिक अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं कि उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले प्रत्येक छोटे-बड़े अस्पताल और क्लीनिक इन नियमों का कड़ाई से पालन करें। आदेश में साफ कर दिया गया है कि यदि कोई भी स्वास्थ्य संस्थान इस निर्देश का उल्लंघन करते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी, ताकि मरीजों के जीवन और अधिकारों की पूरी रक्षा की जा सके।















































