अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी के बहुचर्चित मामले में जांच का दायरा अब तेजी से सिमटता जा रहा है। मामले के मुख्य सूत्रधार रमाशंकर यादव उर्फ ‘टिन्नू’ और उसके भतीजे मनीष यादव को अदालत से 39 घंटे की पुलिस रिमांड मिलने के बाद जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। शनिवार को दोनों आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच मेडिकल जांच के लिए पुलिस लाइन ले जाया गया, जहां से अब उनसे कड़ी पूछताछ का दौर शुरू होगा।
पुलिस रिमांड: खुलेंगे बड़े राज
भ्रष्टाचार निरोधक मामलों की विशेष अदालत ने भले ही पुलिस की 7 दिन की रिमांड की मांग को सीमित करते हुए 39 घंटे की अवधि तय की हो, लेकिन जांच टीम इसे एक बड़ी सफलता मान रही है। अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि इस सीमित समय में दोनों आरोपियों से पूछताछ कर मंदिर की दान पेटी से चोरी की गई नकदी, कीमती आभूषण और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों की बरामदगी सुनिश्चित की जा सकेगी।
सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को जेल में हुई प्रारंभिक पूछताछ के दौरान पुलिस को कई ऐसे नए सुराग मिले थे, जिसके आधार पर रिमांड की अर्जी को मजबूती मिली। टिन्नू, जो राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव के बेहद करीब बताया जाता था, मंदिर के दानपात्रों की सुरक्षा और निगरानी के लिए जिम्मेदार था, वहीं उसका भतीजा मनीष दान की राशि की गणना में सक्रिय था। अपनी इसी पहुंच का फायदा उठाकर उन्होंने मंदिर की पवित्रता को कलंकित करने का काम किया।
अवैध संपत्तियों पर पुलिस की पैनी नजर
पुलिस रिमांड के दौरान अब जांच की दिशा केवल बरामदगी तक सीमित नहीं रहेगी। जांचकर्ता आरोपियों को उन विभिन्न स्थानों पर ले जाएंगे, जहां उन्होंने गबन की गई रकम को ठिकाने लगाया है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इस चोरी की रकम से आरोपियों ने जो अकूत संपत्ति अर्जित की है, पुलिस अब उन संपत्तियों का भौतिक सत्यापन भी करेगी। इससे पहले की कार्रवाई में पुलिस टिन्नू के आवास से 1 लाख रुपये और मनीष के घर से 2 लाख रुपये नकद बरामद कर चुकी है।
8 गिरफ्तारियों से हिली नींव
इस पूरे मामले में अब तक 8 लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। पूर्व बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर मिश्रा की निशानदेही पर पुलिस को नकद, गहने और संपत्तियों के महत्वपूर्ण दस्तावेज पहले ही प्राप्त हो चुके हैं। इस भ्रष्टाचार के खुलासे के बाद ट्रस्ट के दो वरिष्ठ पदाधिकारी इस्तीफा देकर पहले ही चर्चा में आ चुके हैं।
चूंकि यह मामला सीधे तौर पर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर के दान से जुड़ा है, इसलिए इसकी आंच अब सियासत तक पहुंच चुकी है। विपक्ष ने हुंकार भरते हुए स्पष्ट कर दिया है कि 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में राम मंदिर में हुए इस गबन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा। अब देखना यह है कि रिमांड के इन 39 घंटों में पुलिस को और कितनी चौंकाने वाली जानकारियां हाथ लगती हैं।





















































