लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के मौके पर विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस पर अत्यंत तीखा राजनीतिक प्रहार किया है। राजधानी लखनऊ में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में सत्ता पाने की अंधी लालसा इस कदर हावी थी कि सदियों पुराने सनातन राष्ट्र का विभाजन कर दिया गया। इस राजनीतिक स्वार्थ की भारी कीमत देश की आम जनता को चुकानी पड़ी, जिसके चलते करोड़ों लोगों को अपनी ही जन्मभूमि और मातृभूमि से बेघर होना पड़ा तथा लाखों निर्दोष हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायियों का निर्मम कत्लेआम हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाजन का यह दर्द सिर्फ इतिहास का सामान्य पन्ना नहीं, बल्कि पूरी मानवता के इतिहास का सबसे क्रूर और काला अध्याय है।
अतीत की गलतियों से सबक लेना जरूरी: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत की त्रासदी को याद करने की रस्म नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक बड़ा सबक है ताकि उन ऐतिहासिक भूलों की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल याद करने भर से बात नहीं बनेगी; आज भी यह बुनियादी प्रश्न जिंदा हैं कि आखिर देश के टुकड़े क्यों हुए, इसके मुख्य जिम्मेदार कौन थे, क्या किसी दोषी को कोई सजा मिली और आखिर कब तक पूरा देश उस ऐतिहासिक गलती का खामियाजा भुगतेगा? मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा भी यही रही है कि देशवासी अपने गौरवशाली इतिहास पर गर्व करें और पिछली गलतियों का परिमार्जन कर एक सशक्त भविष्य की नींव रखें।
आपसी फूट और आंतरिक षड्यंत्रों के कारण गुलाम हुआ था भारत
देश के ऐतिहासिक पतन पर प्रकाश डालते हुए योगी आदित्यनाथ ने रेखांकित किया कि भारत की पराधीनता के दो सबसे प्रमुख कारण रहे—आपसी अंतर्विरोध और जाति व क्षेत्र के आधार पर समाज का बिखराव। जब समाज में यह उदासीन मानसिकता घर कर गई कि “हमला दूसरे पर हुआ है, हम क्यों बोलें”, तब षड्यंत्रकारियों के हौसले बुलंद हुए और वे देश को गुलाम बनाने में कामयाब रहे। महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरु और रानी लक्ष्मीबाई जैसे अमर बलिदानियों ने जिस आजादी के लिए संघर्ष किया और जहां ‘स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का नारा गूंजा, उस पावन धरा को अंत में सत्ता के भूखे लोगों के कारण विभाजन का दंश झेलना पड़ा।
वोट बैंक और परिवारवादी राजनीति पर सीधा निशाना
मुख्यमंत्री ने मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 1947 में जो ताकतें सत्ता के लालच में चुप बैठी थीं, उनकी राजनीतिक सोच आज भी नहीं बदली है। आज भी कुछ राजनीतिक दल अपने संकीर्ण स्वार्थों के लिए समाज को जाति, क्षेत्र और संप्रदाय में बांटकर कमजोर करने का खेल खेल रहे हैं। उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों की चर्चा करते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील और मानवीय मुद्दों पर भी विपक्षी पार्टियां अपने वोट बैंक के खिसकने के डर से चुप्पी साध लेती हैं। जो दल सत्ता को अपनी निजी जागीर और पारिवारिक विरासत समझते हैं, वे राष्ट्रहित के साथ निरंतर विश्वासघात करते हैं और समाज में अराजकता फैलाने का काम करते हैं।
मौन पदयात्रा निकाल दी श्रद्धांजलि, विस्थापितों का दर्द सुना
इस ऐतिहासिक स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हजरतगंज चौराहा स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा से लेकर लोकभवन तक लगभग आधा किलोमीटर की मौन पदयात्रा निकाली। इस मौन यात्रा के जरिए उन्होंने विभाजन की विभीषिका में जान गंवाने वाले लाखों अमर हुतात्माओं और अपनी जड़ें छोड़कर विस्थापित होने वाले परिवारों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। लोकभवन पहुंचकर मुख्यमंत्री ने त्रासदी पर आधारित विशेष प्रदर्शनी, लघु फिल्म और कलाकारों द्वारा बनाई जा रही लाइव पेंटिंग का अवलोकन किया। इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने 1947 के दौर में विस्थापित होकर भारत आए परिवारों के बुजुर्गों और सदस्यों से सीधी मुलाकात की तथा उनके संघर्ष, दर्द और संस्मरणों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ सुना।





















































