छात्र आंदोलन पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर संसद में चल रहा गतिरोध और अधिक गहरा गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 13 अगस्त को दोपहर 3 बजे इस संवेदनशील विषय पर संसद में अपना पक्ष रखने के ऐलान के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। इस घोषणा पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने बेहद तीखा हमला बोला है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा कि देश की जनता अब केवल खोखले भाषण सुनने के मूड में बिल्कुल नहीं है, बल्कि उसे ठोस और पारदर्शी जवाब चाहिए।
समय-सीमा तय करना अलोकतांत्रिक, केवल सत्र खत्म करने की उतावली
अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने लिखा कि संसद के भीतर जवाब देने के लिए सरकार जिस प्रकार की समय-सीमा निर्धारित करने का प्रयास कर रही है, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के पूरी तरह विपरीत है। सपा मुखिया के अनुसार, इस तरह की तय शर्तों के तहत दिया जाने वाला उत्तर कोई वास्तविक जवाब नहीं होगा, बल्कि महज एक थोथा बयान साबित होगा। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की मंशा किसी सवाल का सामना करने की है ही नहीं, वह तो केवल संसद के सत्र को आनन-फानन में समाप्त करने के लिए उतावली नजर आ रही है।
जिम्मेदारी और जवाबदेही किसी शर्त से नहीं निभाई जाती
सपा अध्यक्ष ने सरकार की नीयत को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि किसी भी जिम्मेदार सरकार में उत्तरदायित्व का निर्वहन समय की किसी समय-सीमा से नहीं, बल्कि तर्कशीलता और नैतिक जवाबदेही के आधार पर होता है। अखिलेश यादव ने जोर देकर कहा कि यह विषय लोगों की किसी सामान्य जिज्ञासा का सतही समाधान करने भर की कोई औपचारिकता नहीं है। यह मामला ईश्वर और इंसान दोनों के साथ हुए दुर्व्यवहार तथा दुर्भावना से जुड़ा हुआ एक अत्यंत संवेदनशील और गंभीर मुद्दा है, जिस पर सरकार को निष्पक्ष होकर सामने आना चाहिए।
छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष आक्रामक
संसदीय गतिरोध की मुख्य वजह 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई कथित बर्बर कार्रवाई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निर्दोष छात्रों पर पैलेट गन और कील लगी लाठियों का इस्तेमाल किया गया। इस घटना के सामने आने के बाद से ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत पूरा विपक्ष एकजुट होकर केंद्र सरकार पर हमलावर है। विपक्षी दल शुरुआत से ही इस पूरे घटनाक्रम पर गृह मंत्री अमित शाह से संसद के पटल पर सीधे जवाब की मांग कर रहे हैं।
गृह मंत्री का चर्चा का प्रस्ताव और विपक्ष की नाराजगी
दूसरी तरफ, हंगामे के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी बात रखते हुए कहा था कि अगर विपक्ष नियमों के तहत चर्चा कराने को सहमत हो, तो सरकार हर एक सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह तत्पर है। उन्होंने दावा किया कि एनडीए सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और बहस के बाद पूरी सच्चाई देश के सामने स्पष्ट हो जाएगी। हालांकि, संसद सत्र के समापन से ठीक एक दिन पहले यानी 13 अगस्त की तारीख और समय तय किए जाने को विपक्ष ने सरकार की एक चाल बताया है, जिससे राजनीतिक टकराव और अधिक तीखा हो गया है।





















































