ग्रेटर नोएडा: संयुक्त किसान मोर्चा के संयुक्त आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के बैनर तले गुरुवार को ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर अन्नदाताओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा। अपने अधिकारों और वर्षों से अटकी मांगों को लेकर सैकड़ों किसानों ने हाथों में तिरंगा थामकर जोरदार बाइक तिरंगा यात्रा निकाली। यमुना एक्सप्रेस-वे के जीरो प्वाइंट से परी चौक होते हुए यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के कार्यालय तक गूंजते ‘वंदे मातरम्’ के नारों के साथ किसानों ने प्रशासनिक तंत्र को साफ संदेश दिया। शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद किसान नेताओं ने यमुना प्राधिकरण के ओएसडी अभिषेक शाही को शासन के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि यदि 18 अगस्त 2026 तक समस्याओं का सार्थक निस्तारण नहीं किया गया, तो 24 अगस्त 2026 को यीडा मुख्यालय पर आर-पार की ऐतिहासिक महापंचायत होगी।
जीरो प्वाइंट से यीडा कार्यालय तक उमड़ा किसानों का हुजूम
गुरुवार की सुबह यमुना एक्सप्रेस-वे के जीरो प्वाइंट पर भारी संख्या में किसान एकत्र हुए। भाकियू के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रवक्ता पवन खटाना के नेतृत्व में शुरू हुई यह विशाल तिरंगा बाइक यात्रा मुख्य मार्गों से होते हुए गुजरी। सैकड़ों दोपहिया वाहनों पर लहराते राष्ट्रीय ध्वज और देशभक्ति के नारों ने पूरे मार्ग का माहौल ऊर्जावान बना दिया। यह पूरी रैली अत्यंत अनुशासित और लोकतांत्रिक तरीके से निकाली गई, जिसका एकमात्र मकसद शासन और यीडा के शीर्ष अधिकारियों तक गौतमबुद्ध नगर के किसानों की अनसुलझी समस्याओं की गूंज पहुंचाना था।
18 अगस्त तक की समयसीमा, अन्यथा 24 अगस्त को निर्णायक महापंचायत
यमुना प्राधिकरण दफ्तर पहुंचकर किसान प्रतिनिधिमंडल ने ओएसडी अभिषेक शाही को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान भाकियू नेता पवन खटाना ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसान सदैव शांति और संवाद के पक्षधर रहे हैं, लेकिन उनकी अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राधिकरण व सरकार के पास 18 अगस्त 2026 तक सभी प्रमुख बिंदुओं को हल करने का समय है। यदि तय समय में समाधान निकलता है तो संगठन अधिकारियों का सार्वजनिक आभार व्यक्त करेगा। इसके विपरीत, यदि टालमटोल की नीति जारी रही, तो 24 अगस्त 2026 को प्राधिकरण मुख्यालय पर विशाल महापंचायत का आयोजन किया जाएगा और आंदोलन को हर एक गांव की दहलीज तक ले जाया जाएगा।
64.7% अतिरिक्त मुआवजा और 10% भूखंड आवंटन मुख्य मांगें
भाकियू के जिला मीडिया प्रभारी सुनील प्रधान ने ज्ञापन के मुख्य बिंदुओं की जानकारी देते हुए बताया कि विकास की आड़ में स्थानीय भूमिपुत्रों के हितों की अनदेखी हो रही है। किसानों के मांग पत्र में निम्नलिखित प्रमुख मुद्दे शामिल हैं:
- 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर: सभी प्रभावित किसानों को अविलंब अतिरिक्त मुआवजे का पूर्ण भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
- आवासीय भूखंड नीति: प्रभावित काश्तकारों को 10 प्रतिशत विकसित आवासीय भूखंड तुरंत आवंटित किए जाएं।
- आबादी एवं लीजबैक मामले: गांवों की आबादी के लीजबैक और शिफ्टिंग से संबंधित तमाम पुराने मामलों का प्राथमिकता पर निपटारा हो।
- रोजगार व पुनर्वास: भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों के युवाओं को स्थानीय उद्योगों में अनिवार्य रोजगार और पुनर्वास की ठोस व्यवस्था मिले।
- एमएसपी व कर्ज माफी: देशव्यापी मांगों के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी दी जाए और किसानों के ऋण माफ किए जाएं।
आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के लिए गांव-गांव पहुंचेगा आंदोलन
किसान नेताओं ने रेखांकित किया कि गौतमबुद्ध नगर और यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र में चल रहे तीव्र शहरीकरण व औद्योगिक विस्तार से स्थानीय कृषक समाज की आजीविका पर गहरा असर पड़ा है। ऐसे में किसानों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि तय सीमा के भीतर मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यूनियन के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर चौपालें लगाएंगे और आगामी 24 अगस्त की महापंचायत को ऐतिहासिक बनाने के लिए हर ग्रामीण को आंदोलन से जोड़ेंगे।





















































