उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों में जुटे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और जारी आंदोलन के मुद्दे को उठाते हुए राजभर ने विपक्षी नेताओं की चुप्पी और उनके रुख पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने अखिलेश यादव को मित्र संबोधित करते हुए सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई तंज कसे और पूछा कि क्या उनका ‘पीडीए’ का नारा और कथित ‘क्रांति’ सिर्फ दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमाओं तक ही सीमित है?
‘चार्टर से डेढ़ घंटे का सफर, जाकर घड़ियाली आंसू ही बहा आइए’
सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अखिलेश यादव पर चुटकी लेते हुए लिखा कि उम्मीद है वे ठीक-ठाक होंगे और अपनी धुन में मस्त होंगे। राजभर ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा, “मित्र अखिलेश, इस मस्ती के दौर में आप झारखंड जा रहे हैं या नहीं? देश जवाब मांग रहा है, बस हां या ना में उत्तर दे दीजिए।” उन्होंने आगे लिखा कि लखनऊ से रांची चार्टर्ड प्लेन से महज डेढ़ घंटे और दिल्ली से लगभग दो घंटे का रास्ता है। अगर सच्चे दिल से छात्रों के हितैषी बनते हैं, तो वहां जाकर थोड़े झूठे आंसू ही बहा आएं, ताकि जनता को लगे कि वे वाकई परीक्षार्थियों की चिंता करते हैं।
विपक्ष के ‘दोगुने रवैये’ और पीडीए की राजनीति पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव और राहुल गांधी के राजनीतिक रवैये पर उंगली उठाते हुए मंत्री राजभर ने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्यों में ही राजनीति चमकाने जाता है। उन्होंने कहा कि अगर झारखंड में भाजपा की सरकार होती, तो अब तक समाजवादी पार्टी के सांसद वहां रील बनवाते दिखते और राहुल गांधी भी छात्रों के साथ हमदर्दी जताने पहुंच जाते। राजभर ने अखिलेश यादव के बहुचर्चित ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर प्रहार करते हुए कहा कि झारखंड में पुलिस की लाठियां खाने वाले छात्र भी इसी पीडीए समाज से आते हैं, जिनके नाम पर सपा पिछले दो सालों से राजनीति कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब गैर-भाजपा शासित राज्यों की बात आती है, तो पूरा विपक्ष ठीक वैसे ही खामोश हो जाता है, जैसे पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के शासन के दौरान घटित घटनाओं पर चुप रहता है।
झारखंड में गहराया छात्र आंदोलन और पुलिस से झड़प
झारखंड में इस समय झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा चरम पर है। बीते 10 अगस्त को जब हजारों की संख्या में आक्रोशित छात्र अपनी मांगों को लेकर विधानसभा घेराव के लिए बढ़े, तो पुलिस के साथ उनकी तीखी झड़प हो गई। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को वॉटर कैनन (पानी की बौछारों) और बल प्रयोग का सहारा लेना पड़ा। हालांकि झारखंड सरकार का दावा है कि उसने छात्रों की लगभग 98 प्रतिशत मांगें स्वीकार कर ली हैं, लेकिन अभ्यर्थी पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराने की मुख्य मांग पर अड़े हुए हैं। इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर राजभर ने विपक्षी गठबंधन की नीतियों और नीयत पर करारा प्रहार किया है।





















































