सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित नई एसआईटी ने पकड़ी रफ्तार
उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित ऐतिहासिक श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित हेरफेर के मामले की जांच अब एक नए और निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। उच्चतम न्यायालय के सख्त निर्देशों के बाद इस संवेदनशील मामले की तह तक जाने के लिए नवगठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। प्रशासनिक हलकों से मिल रही जानकारियों के अनुसार, जांच का दायरा अब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों तक पहुंच गया है, जिसके तहत पूर्व ट्रस्टी से पूछताछ की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
मंदिर के वित्तीय प्रबंधन और चढ़ावे की गिनती से जुड़े विभिन्न पहलुओं की छानबीन करने के बाद अब जांच एजेंसियों का पूरा फोकस उन जिम्मेदार चेहरों पर है, जो इस पूरी व्यवस्था से सीधे तौर पर जुड़े रहे हैं।
पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को नोटिस भेजने की तैयारी
जांच से जुड़े घटनाक्रम के मुताबिक, विशेष जांच टीम ने अब अपनी कानूनी और प्रक्रियागत कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा से पूछताछ करने का निर्णय लिया है। इसके लिए उन्हें विधिवत नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एसआईटी द्वारा बैंक से प्राप्त आधिकारिक रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन के दस्तावेज और अब तक की गई साक्ष्य संकलन प्रक्रिया के आधार पर डॉ. मिश्रा से विस्तृत पूछताछ किए जाने की संभावना है।
अधिकारियों का यह भी कहना है कि इस प्रकरण की समग्रता से जांच करने के लिए आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट से जुड़े अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों, जिनमें गोपाल राव का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है, से भी आने वाले दिनों में पूछताछ की जा सकती है। इससे पहले, जांच टीम ने मंदिर में चढ़ावे की गिनती में शामिल रहे बैंक कर्मियों के बयान दर्ज कर कई महत्वपूर्ण तथ्य पहले ही एकत्र कर लिए हैं।
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नेतृत्व में हो रही है उच्चस्तरीय जांच
इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए गत 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सीधी निगरानी में एक नए स्वरूप वाली विशेष जांच टीम के गठन का आदेश दिया था। इसके अनुपालन में उत्तर प्रदेश शासन ने पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. की अध्यक्षता में एक उच्च 3 सदस्यीय एसआईटी का आधिकारिक पुनर्गठन 26 जुलाई को किया।
इस विशेष जांच दल में अयोध्या रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक सोमेन वर्मा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर को भी शामिल किया गया है। हालांकि इस नई टीम की अभी तक कोई औपचारिक सामूहिक बैठक नहीं हुई है, किंतु जमीनी स्तर पर और कागजी दस्तावेजों के आधार पर पुलिस विभाग की ओर से जांच का कार्य बेहद सुनियोजित तरीके से लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
एक तरफ जहां प्रशासनिक स्तर पर एसआईटी जांच का शिकंजा कसता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी अपने आंतरिक प्रशासनिक ढांचे में कई बड़े बदलाव किए हैं। गत 22 जुलाई को आयोजित एक विशेष बैठक में ट्रस्ट ने अपने पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया को लगभग एक महीने के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया।
इसके साथ ही, मंदिर से संबंधित जानकारियों के पारदर्शी संचार और जनसंपर्क को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक आधिकारिक प्रवक्ता की नियुक्ति की गई है। ट्रस्ट की इस बैठक में पूर्णकालिक महासचिव के पद पर नियुक्ति को भी अपनी स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, मंदिर परिसर में संपन्न होने वाली पूजा-पद्धति, धार्मिक अनुष्ठानों और प्राचीन परंपराओं की शुद्धता एवं पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए धार्मिक समिति के पुनर्गठन का भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।





















































