गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गोरखपुर में सीएम योगी का तीखा प्रहार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौजूदा समय में देश के भीतर और बाहर सक्रिय विभाजनकारी ताकतों पर कड़ा प्रहार किया है। गोरखपुर स्थित प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा के पूर्णाहुति समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब-जब भारत ने प्रगति और वैभव के नए शिखरों को छुआ है, तब-तब राष्ट्र को अंदरूनी और बाहरी दोनों मोर्चों पर कमजोर करने के षड्यंत्र रचे गए हैं।
आज के समय में भी कुछ ऐसी ताकतें लगातार सक्रिय हैं जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सनातन संस्कृति को आहत करना चाहती हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि विडंबना यह है कि इन विध्वंसक ताकतों के ‘प्रवक्ता’ बनकर समाज में भ्रम फैलाने वाले लोग कहीं बाहर से नहीं, बल्कि हमारे ही बीच से निकलकर सामने आ रहे हैं। ऐसे में देश की अखंडता और सांस्कृतिक धरोहर की हिफाजत के लिए नागरिकों को अत्यधिक सजग और सतर्क रहने की आवश्यकता है।
भारतीय संस्कृति और ऋषि परंपरा का वैश्विक विस्तार
भारतीय सनातन परंपरा में गुरु के गौरवशाली पद को रेखांकित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि जीवन में गुरु का स्थान सर्वोच्च होता है, जिससे मनुष्य ज्ञान प्राप्त कर अपना मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे आज पूरी दुनिया 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मना रही है। योग असल में हमारी प्राचीन ऋषि परंपरा का वह वैज्ञानिक और अनुभूत स्वरूप है, जिसे आज संपूर्ण विश्व ने सहर्ष स्वीकार कर लिया है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के उस आह्वान का भी विशेष उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने देशवासियों से प्राचीन पांडुलिपियों, ताम्रपत्रों, दुर्लभ सिक्कों और अन्य ऐतिहासिक अवशेषों को सहेजने की अपील की थी। इस विशेष अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और उत्तर प्रदेश में भारी मात्रा में ऐसी अमूल्य ऐतिहासिक वस्तुएं प्राप्त हुई हैं, जो इस बात की पुख्ता गवाही देती हैं कि भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान और विज्ञान का सबसे बड़ा केंद्र रहा है।
‘भारत का निर्माण अंग्रेजों ने किया’ का विचार देश का सबसे बड़ा अपमान
इतिहास के पन्नों को खंगालते हुए मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में खारिज किया कि भारत का निर्माण अंग्रेजों ने किया था। उन्होंने दो टूक कहा कि इस तरह का विचार रखना भारत के गौरवशाली इतिहास का सबसे बड़ा अपमान है। यह देश आज से नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से एक राष्ट्र के रूप में निरंतर अस्तित्व में रहा है।
इस विशाल राष्ट्र में भले ही उपासना पद्धतियां, खान-पान, वेशभूषा और भाषाएं भिन्न-भिन्न रही हों, लेकिन उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक का यह भूभाग हमेशा से एक ही साझा सांस्कृतिक चेतना के सूत्र में बंधा रहा है। हालांकि, समय-समय पर राजनीतिक स्वार्थों और विकृतियों ने जातीयता तथा क्षेत्रीयता की आड़ में देश को खंडित करने के प्रयास किए, परंतु हर बार भारत ने इन तमाम चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया। आज हम जिस स्वतंत्र परिवेश में सांस ले रहे हैं, वह किसी जाति या क्षेत्र विशेष तक सीमित न होकर ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की साझा भावना का प्रतिफल है।
इतिहास के उदाहरण और वर्तमान की चुनौतियां
अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए सीएम योगी ने ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला दिया। उन्होंने भगवान श्री राम के वनवास काल, महाभारत युग और महान सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब भी राष्ट्र किसी बड़े और महान लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ा, उसके रास्ते में बाधाएं खड़ी की गईं। जब समाज अपनी उपलब्धियों और वैभव में मग्न होकर आत्ममुग्ध हो जाता है, तब कुछ तत्व षड्यंत्रों के जरिए व्यवस्था की जड़ों को खोखला करने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने आगाह किया कि आज भी वैश्विक स्तर पर ऐसी ताकतें मौजूद हैं जो अपने निहित स्वार्थों के चलते सनातन संस्कृति का पतन चाहती हैं। इन राष्ट्रविरोधी एजेंडों को आगे बढ़ाने वाले लोग समाज के भीतर से ही घुसपैठ कर भ्रम का जाल बुनते हैं।
नक्सलवाद का अंत और राष्ट्रविरोधी प्रवृत्तियों से सजगता का संदेश
समाज को जागरूक करने का आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय देश के लगभग 120 जिले नक्सलवाद की विभीषिका से बुरी तरह प्रभावित थे, जिन्हें आज दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर लगभग समाप्त कर दिया गया है।
इसके बावजूद, देशविरोधी मानसिकता रखने वाले लोग कभी भी निष्क्रय नहीं बैठते हैं। वे बदलती हुई परिस्थितियों और समय के अनुसार नए रूपों और नए नामों के साथ समाज के सामने प्रकट होते रहते हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक और पूरे समाज का यह परम दायित्व बनता है कि वह हर प्रकार की विभाजनकारी और राष्ट्र विरोधी प्रवृत्तियों के प्रति सदैव आंखें खुली रखे, क्योंकि जितना अधिक समाज जागरूक और संगठित होगा, देश का भविष्य उतना ही सुरक्षित और समृद्ध बनेगा।





















































