आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर वाराणसी में आयोजित हुआ भव्य कार्यक्रम
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में भगवान बुद्ध के आदर्शों की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए उन्हें आज के अशांत दौर की सबसे बड़ी जरूरत करार दिया है। वाराणसी के प्रतिष्ठित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हायर तिब्बतन स्टडीज के सभागार में आषाढ़ पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने यह विचार व्यक्त किए।
डिप्टी सीएम ने अपने संबोधन की शुरुआत में भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश स्थल सारनाथ की महत्ता को रेखांकित किया और इसे पूरी मानवता के लिए शांति, सह-अस्तित्व और करुणा का शाश्वत केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि आषाढ़ पूर्णिमा का यह विशेष दिन मानव कल्याण, भाईचारे और विश्व बंधुत्व के उच्च मूल्यों को अपने जीवन में उतारने का एक उत्तम अवसर प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बढ़ रही भारत की वैश्विक सांस्कृतिक प्रतिष्ठा
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए उपमुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के गतिशील नेतृत्व में देश न केवल अपनी प्राचीन और गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित कर रहा है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसे एक नई प्रतिष्ठा भी दिला रहा है।
अपने विदेशी दौरों के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने विशेष रूप से अपनी रूस यात्रा का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वहां के नागरिकों में भगवान बुद्ध के प्रति जो अटूट श्रद्धा और सम्मान देखने को मिला, वह भारत की हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक ताकत और आध्यात्मिक प्रभाव का सीधा प्रमाण है। मौर्य ने कहा कि प्राचीन काल में महान सम्राट अशोक ने भगवान बुद्ध के शांति संदेश को सीमाओं से परे दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने का ऐतिहासिक कार्य किया था, और आज केंद्र तथा राज्य की डबल इंजन सरकार उसी महान परंपरा और विरासत को सहेजते हुए आगे बढ़ा रही है।
सारनाथ का यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होना गौरव का क्षण
डिप्टी सीएम ने सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिलने को देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सम्मान केवल उत्तर प्रदेश या भारत भर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण मानवता की साझा सांस्कृतिक थाती का वैश्विक अभिनंदन है।
मौर्य ने इस बात पर विशेष बल दिया कि वर्तमान समय में जब विश्व का एक बड़ा हिस्सा विभिन्न प्रकार की हिंसा, तनाव और संघर्षों से जूझ रहा है, ऐसे में भगवान बुद्ध के कालजयी और अहिंसक विचार ही संपूर्ण मानवता को स्थायी शांति और सामाजिक सद्भाव का सही मार्ग दिखा सकते हैं।
बौद्ध सर्किट का विकास और रोजगार को मिल रहा बढ़ावा
बौद्ध पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध से जुड़े तमाम प्रमुख तीर्थ स्थलों को आधुनिक बुनियादी ढांचे से जोड़ा जा रहा है। इन पवित्र स्थलों तक सड़क, रेल और हवाई यातायात सेवाओं को सुगम बनाने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।
इस बेहतर कनेक्टिविटी के चलते देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भारी सुविधा मिल रही है, जिससे बौद्ध सर्किट को नई रफ्तार मिली है। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन का दायरा विस्तृत हो रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
संत रविदास की जयंती का उल्लेख और सांस्कृतिक संरक्षण की प्रतिबद्धता
अपने संबोधन के अंत में उपमुख्यमंत्री ने संत शिरोमणि गुरु रविदास की आने वाली 650वीं जयंती के पावन प्रसंग का स्मरण करते हुए देश और प्रदेशवासियों को अग्रिम शुभकामनाएं प्रेषित कीं। उन्होंने कहा कि संत रविदास का सामाजिक समरसता, आपसी समानता और निस्वार्थ मानव सेवा का संदेश आज के आधुनिक समाज के लिए भी एक मार्गदर्शक प्रेरणास्त्रोत बना हुआ है।
उन्होंने दोहराया कि उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, धार्मिक पर्यटन के चहुंमुखी विकास तथा काशी, सारनाथ, अयोध्या और मथुरा समेत सभी प्रमुख आध्यात्मिक एवं धार्मिक केंद्रों के समग्र कायाकल्प के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इस दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।





















































