अयोध्या में भव्य राम मंदिर के दान पात्र से जुड़ी कथित अनियमितताओं और विवाद ने अब एक बड़ा सियासी और संत समाज का रूप ले लिया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर तपस्वी छावनी पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंसाचार्य ने सीधे तौर पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में एक गहरी साजिश की आशंका जताते हुए दोनों शीर्ष नेताओं के ‘नार्को टेस्ट’ (Narco Test) की सख्त मांग कर दी है, जिससे उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में हलचल मच गई है।
सनातन आस्था को ठेस पहुंचाने की साजिश का आरोप जगद्गुरु परमहंसाचार्य ने इस पूरे मामले को सनातन धर्म को बदनाम करने का एक सुनियोजित एजेंडा करार दिया है। न्यूज़ एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि राम जन्मभूमि में दान राशि के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) पूरी निष्ठा के साथ अपना काम कर रही है। उन्हें पूरा भरोसा है कि एसआईटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस षड्यंत्र की असली जड़ तक पहुंचने के लिए केवल एसआईटी जांच काफी नहीं है। जब तक राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे विपक्षी नेताओं का नार्को टेस्ट नहीं होता, तब तक देश के सामने इस विवाद के पीछे छिपी असली सच्चाई नहीं आ पाएगी।
अखिलेश यादव पर उठे गंभीर सवाल: “जब मंदिर गए नहीं, तो चोरी का कैसे पता?” तपस्वी छावनी के महंत ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर सीधे और चुभते हुए सवाल दागे हैं। उन्होंने हैरानी जताते हुए पूछा कि अखिलेश यादव आज तक अयोध्या में रामलला के दर्शन करने और मंदिर परिसर में नहीं आए हैं, तो फिर आखिर उन्हें यह गुप्त जानकारी कहां से मिल गई कि राम मंदिर के चढ़ावे या दान पात्र में कोई चोरी हुई है? परमहंसाचार्य ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि राम मंदिर और सनातन आस्था की छवि को धूमिल करने के लिए इस तरह की भ्रामक बयानबाजी और नकारात्मक माहौल जानबूझकर तैयार किया जा रहा है। इसलिए, इस पूरे नैरेटिव के पीछे इन नेताओं की भूमिका की भी सघन जांच होनी चाहिए।
सपा प्रमुख का तंज: “आईआईटी की जगह एसआईटी बना रही सरकार” यह पूरा विवाद तब और गहरा गया था जब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा व्यंग्य किया था। उन्होंने राम मंदिर मामले में एसआईटी के गठन को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि वर्तमान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार का ध्यान युवाओं के भविष्य के लिए ‘आईआईटी’ (IIT) बनाने पर नहीं है, बल्कि वह हर मामले में सिर्फ ‘एसआईटी’ (SIT) बनाने में व्यस्त है। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया था।
मौलाना अबरार जमाल ने की सीएम योगी के विकास कार्यों की तारीफ विपक्ष के इन लगातार हमलों के बीच, लखनऊ स्थित जमीयत हिमायतुल इस्लाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना कारी अबरार जमाल ने भी अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अखिलेश यादव के ‘एसआईटी’ वाले बयान को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का काम केवल सरकार पर आरोप लगाना रह गया है और वे वही कर रहे हैं। मौलाना जमाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन और नेतृत्व की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि योगी सरकार के शासनकाल में उत्तर प्रदेश ने हर क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास किया है। इसी चौतरफा प्रगति की बदौलत आज उत्तर प्रदेश सचमुच ‘उत्तम प्रदेश’ के रूप में अपनी पहचान बना चुका है और राज्य लगातार विकास के पथ पर अग्रसर है।
फिलहाल, राम मंदिर के दान पात्र से जुड़ा यह हाई-प्रोफाइल मामला एसआईटी के पास है। एक तरफ जहां पुलिस और प्रशासन अपनी वैज्ञानिक जांच में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ संत समाज, राजनीतिक दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के बीच जुबानी जंग ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बना दिया है।





















































