महराजगंज। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित प्रमुख सोनौली चेकपोस्ट पर इमिग्रेशन विभाग की सतर्कता से एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। नियमित जांच अभियान के दौरान अधिकारियों ने थाईलैंड की एक महिला नागरिक को फर्जी भारतीय दस्तावेजों के आधार पर पहचान छुपाने के आरोप में हिरासत में लिया है। पकड़ी गई विदेशी महिला नेपाल के रास्ते भारतीय सीमा में प्रवेश करने की कोशिश कर रही थी। सुरक्षा और आव्रजन एजेंसियों द्वारा सघन पूछताछ के उपरांत महिला के खिलाफ सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर विधिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
जांच के दौरान बातचीत और भाषा से गहराया संदेह
सोनौली स्थित इमिग्रेशन कार्यालय पर नेपाल से भारत आने वाले प्रत्येक अंतरराष्ट्रीय और घरेलू यात्री के दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जा रही थी। उसी क्रम में एक महिला यात्री ने अधिकारियों के समक्ष थाईलैंड का मूल पासपोर्ट (संख्या AC2825032) और वीजा प्रस्तुत किया। सत्यापन प्रक्रिया के दौरान महिला के लहजे, बोलचाल और जवाब देने की शैली पर इमिग्रेशन अधिकारियों को गंभीर संदेह हुआ।
संदेह के आधार पर जब उससे विस्तृत पूछताछ की गई, तो उसकी वास्तविक पहचान थाईलैंड निवासी चोन चुतिचिराफत के रूप में स्थापित हुई। गहन तलाशी के दौरान उसके पास मौजूद मोबाइल फोन से कई भारतीय पहचान पत्रों की डिजिटल प्रतियां बरामद की गईं, जो पूरी तरह संदिग्ध पाई गईं।
‘करुणा रुपनी देवी दासी’ के नाम से बनाए गए थे दस्तावेज
डिजिटल उपकरणों की तकनीकी जांच में सामने आया कि विदेशी महिला की पहचान को छुपाकर ‘करुणा रुपनी देवी दासी’ पत्नी मित्रलाल खनाल, निवासी वैष्णव नगर, रमनरेती, वृंदावन (मथुरा) के नाम से अवैध पहचान पत्र तैयार किए गए थे। मोबाइल फोन से प्राप्त फर्जी दस्तावेजों में:
- जाली भारतीय आधार कार्ड
- वोटर आईडी कार्ड (संख्या ZMY4348066)
- पैन कार्ड (संख्या DAFPD459D)
ये सभी दस्तावेज भारतीय नागरिकता के अवैध साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करने के उद्देश्य से तैयार कराए गए थे।
दो दशक पुरानी कहानी: थाईलैंड में निकाह और मथुरा में आशियाना
सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि चोन चुतिचिराफत का विवाह वर्ष 2005 में थाईलैंड में एक नेपाली नागरिक मित्रलाल खनाल के साथ हुआ था। वर्ष 2006 में वह अपने पति के साथ भारत आ गई और मथुरा के वृंदावन क्षेत्र में किराए का मकान लेकर रहने लगी।
इसके बाद वर्ष 2011 में दंपत्ति ने मथुरा में जमीन खरीदकर अपना निजी मकान बनाया। आरोप है कि भारत में स्थाई रूप से बसने और अपनी विदेशी पहचान को दबाने के लिए सुनियोजित तरीके से उसके नाम पर फर्जी भारतीय पहचान पत्र तैयार करवाए गए। दंपत्ति के दो बच्चे—पुत्री नंदनी (20 वर्ष) और पुत्र नीरज (18 वर्ष)—भी मथुरा में ही रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
नेपाल भ्रमण से लौटते वक्त चढ़ी हत्थे
जांच विवरण के अनुसार, महिला 19 मई 2026 को निजी यात्रा पर नेपाल गई थी। 16 अगस्त को जब वह सोनौली अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते पुनः भारत में दाखिल होने का प्रयास कर रही थी, तभी इमिग्रेशन जांच दल के हत्थे चढ़ गई। इमिग्रेशन विभाग ने अग्रिम कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए आरोपी महिला को स्थानीय सोनौली थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया।
सोनौली कोतवाल महेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि विदेशी नागरिक द्वारा पहचान बदलकर भारतीय सरकारी दस्तावेज बनवाने और उनका उपयोग करने के गंभीर मामले में सघन पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि मथुरा में इन फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने में किन-किन स्थानीय एजेंटों या लोगों ने सहयोग किया था। मामले में अग्रिम कानूनी कार्रवाई निरंतर जारी है।





















































