अयोध्या। अयोध्या स्थित भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की धनराशि से जुड़े विवादित मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है। इस जांच रिपोर्ट में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और कोषाध्यक्ष अनिल मिश्रा को सभी आरोपों से मुक्त करते हुए क्लीन चिट दे दी गई है। जांच के इस निष्कर्ष के सामने आने के बाद अयोध्या के प्रमुख साधु-संतों, धर्माचार्यों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने राहत व्यक्त करते हुए रिपोर्ट का खुले दिल से स्वागत किया है।
संत समाज का स्पष्ट रुख: निष्पक्ष जांच से सच आया सामने
राम वल्लभ कुंज के उत्तराधिकारी और राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति के प्रमुख सदस्य महंत राजकुमार दास ने जांच रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संत समाज पहले दिन से ही चंपत राय की निष्पक्षता और सत्यनिष्ठा को लेकर पूरी तरह आश्वस्त था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वित्तीय गड़बड़ी में केवल कुछ कर्मचारी संलिप्त पाए गए हैं, जिन्हें पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और वे कानून के तहत अपने कृत्यों की सजा भुगत रहे हैं।
तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर हुई पारदर्शी कार्रवाई
तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने एसआईटी जांच की सराहना करते हुए कहा कि जांच एजेंसी ने बिना किसी बाहरी दबाव के निष्पक्षता, ठोस तथ्यों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अपनी जांच पूरी की है। उन्होंने कहा कि चंपत राय ने राष्ट्र स्तर पर भव्य मंदिर निर्माण के संकल्प को साकार करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, इसलिए उन पर लगे आरोपों का निराधार साबित होना स्वाभाविक था। परमहंस आचार्य ने उम्मीद जताई कि भविष्य में राम मंदिर की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा ऐसा कोई भी अप्रिय घटनाक्रम सामने नहीं आएगा।
सुप्रीम कोर्ट में तीन सप्ताह के भीतर दाखिल होगी अंतिम रिपोर्ट
अयोध्या के महापौर गिरीश पति त्रिपाठी ने पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया का ब्योरा देते हुए बताया कि स्वयं राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहल पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी और ट्रस्ट के आग्रह पर ही एसआईटी का गठन हुआ था।
महापौर ने कहा कि इस अंतरिम जांच रिपोर्ट से समाज में फैले सभी प्रकार के भ्रम और संशय समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने जानकारी दी कि माननीय उच्चतम न्यायालय ने जांच एजेंसी को अपनी अंतिम रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत किसी भी वास्तविक दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।





















































