मथुरा जिले में एक शर्मनाक मामला सामने आया है, जहां कानून की रक्षा करने की जिम्मेदारी निभाने वाला दरोगा खुद अपराधियों का संरक्षक बन गया। जैंत थाना क्षेत्र अंतर्गत चारधाम पुलिस चौकी के प्रभारी उप-निरीक्षक शशांक कौशिक को अपने ही हिस्ट्रीशीटर गुर्गों के माध्यम से स्थानीय दुकानदारों से अवैध वसूली करने और अवैध पार्किंग संचालित करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। इस कार्रवाई ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है और विभाग की छवि को भारी नुकसान पहुंचाया है। एसएसपी श्लोक कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी दरोगा के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं और उसके फरार सहयोगियों पर इनाम घोषित किया है।
दुकानदारों की शिकायत पर खुली पोल
घटनाक्रम की शुरुआत लगभग एक सप्ताह पहले हुई थी, जब चारधाम चौकी क्षेत्र के व्यापारियों ने वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की थी कि दो संदिग्ध युवक उनसे ‘मासिक चौथ’ के नाम पर 15 से 20 हजार रुपये की मोटी रकम जबरन वसूल रहे हैं। व्यापारियों का आरोप था कि यह वसूली दरोगा के संरक्षण में की जा रही है। इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद एसएसपी ने तुरंत सदर क्षेत्राधिकारी (सीओ) पीतम पाल सिंह को मामले की निष्पक्ष जांच का जिम्मा सौंपा। जांच में दरोगा की मिलीभगत और व्यापारियों के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।
दरोगा ने बुलाए थे पुराने ‘अपराधी मित्र’
जांच के दौरान एक हैरान करने वाला तथ्य सामने आया कि चौकी प्रभारी शशांक कौशिक ने वसूली के इस काले कारोबार को अंजाम देने के लिए अपने पुराने तैनाती स्थल, अलीगढ़ के इगलास क्षेत्र से दो पेशेवर हिस्ट्रीशीटरों—रोहताश उर्फ विशाल और छोटू सोलंकी को विशेष रूप से मथुरा बुलाया था। ये दोनों बदमाश इगलास के दुमेड़ी गांव के निवासी हैं और दरोगा के इशारे पर स्थानीय दुकानदारों को धमकाकर अवैध वसूली करते थे। दरोगा की इस कारस्तानी ने साबित कर दिया कि वह पुलिस चौकी का उपयोग नहीं, बल्कि अपराध का अड्डा बनाने की साजिश रच रहा था।
दरोगा सलाखों के पीछे, फरार गुर्गों पर इनाम
शिकायत की पुष्टि होने के बाद, शुक्रवार को पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए चौकी प्रभारी शशांक कौशिक और उनके दोनों हिस्ट्रीशीटर साथियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दरोगा को गिरफ्तार कर लिया, जबकि छापेमारी के दौरान दोनों हिस्ट्रीशीटर वहां से फरार होने में सफल रहे। उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए एसएसपी ने प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।
‘भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस’ का संकल्प
एसएसपी श्लोक कुमार ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है। यह विशेष रूप से चिंताजनक है कि आरोपी दरोगा को महज कुछ दिन पहले, यानी 3 जून को ही चारधाम चौकी का प्रभार सौंपा गया था, जिसके बाद उसने आते ही अपनी काली करतूतें शुरू कर दीं। पुलिस का कहना है कि दरोगा के पूरे कार्यकालों और इस अवैध वसूली नेटवर्क के अन्य संपर्कों की गहन जांच की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर से यह संदेश दिया है कि वर्दी की आड़ में अपराध करने वाला कोई भी व्यक्ति कानून से बच नहीं पाएगा।





















































