उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के महाअभियान के तहत राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय पूंजी निवेश को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया को अभूतपूर्व गति दे दी है। हाल ही में सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के 14 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में दोनों पक्षों के बीच औद्योगिक विकास, अत्याधुनिक लॉजिस्टिक्स, सेमीकंडक्टर निर्माण, डेटा सेंटर, ग्रीन एनर्जी और स्मार्ट शहरी नियोजन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को लेकर व्यापक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट शब्दों में निवेशकों को आश्वस्त किया कि उत्तर प्रदेश सरकार केवल कागजी समझौतों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एमओयू (समझौता ज्ञापन) से लेकर प्लांट से विनिर्माण शुरू होने तक हर कदम पर पूरी तरह उनके साथ खड़ी है।
एमओयू से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक निवेशकों को मिलेगा पूरा सहयोग
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जोर देकर कहा कि प्रदेश सरकार का मुख्य फोकस अब निवेश प्रस्तावों को केवल कागजों तक सीमित रखने का नहीं, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारकर जमीनी स्तर पर उत्पादन शुरू करने और स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करने का है। सरकार का स्पष्ट ध्येय ‘एमओयू से मैन्युफैक्चरिंग’ और ‘ग्राउंडब्रेकिंग से प्रोडक्शन’ तक की पूरी प्रक्रिया को तीव्र गति प्रदान करना है। फरवरी 2026 में अपनी सिंगापुर यात्रा का स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उस दौरान लगभग 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश समझौतों पर सहमति बनी थी। निवेशकों को सुरक्षा, प्रशासनिक स्थिरता और तीव्र गति से कार्य पूरा कराने का जो वादा किया गया था, सरकार आज उसी संकल्प और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है।
उत्तर प्रदेश का बदलता परिदृश्य और आर्थिक सुदृढ़ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओजस्वी नेतृत्व में भारत ने वैश्विक पटल पर अपनी आर्थिक स्थिति को अत्यंत मजबूत किया है। इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश भी अपनी पूर्व की ‘बीमारू’ छवि को पीछे छोड़कर देश के अग्रणी विकास केंद्रों में प्रमुखता से शामिल हो चुका है। प्रदेश की कुल जीडीपी, वार्षिक बजट और प्रति विशेष रूप से नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
इस दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट एक समर्पित ‘सिंगापुर सिटी’ और अत्याधुनिक हाईटेक औद्योगिक टाउनशिप विकसित करने का अनूठा प्रस्ताव रखा। जेवर क्षेत्र की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, विशाल एक्सप्रेसवे नेटवर्क तथा पूर्वी व पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारों (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) से इसकी बेहतरीन कनेक्टिविटी इसे उत्तर भारत का सबसे प्रमुख आपूर्ति शृंखला (सप्लाई चेन) केंद्र बनाने की पूरी क्षमता प्रदान करती है।
निवेश के लिए विशाल लैंड बैंक और प्राथमिकता वाले छह प्रमुख क्षेत्र
राज्य में औद्योगिक निवेश को सुगम बनाने के लिए 75 हजार एकड़ से अधिक का विशाल लैंड बैंक उपलब्ध कराया गया है, और साथ ही 27 एकीकृत विनिर्माण एवं लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे (डिफेंस कॉरिडोर) के लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट स्थित छह प्रमुख केंद्रों को पहले ही 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के भारी-भरकम निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने सिंगापुर के निवेशकों के समक्ष भविष्य की साझेदारी के लिए छह प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को रेखांकित किया:
- मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग नेटवर्क
- सेमीकंडक्टर तथा आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण
- डेटा सेंटर और क्लाउड आधारित सेवाएं
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और उन्नत तकनीक
- स्वच्छ ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) और आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन
कृषि, पर्यटन और शहरी नियोजन में व्यापक संभावनाओं के द्वार
वर्तमान में देश के कुल मोबाइल उत्पादन का लगभग 55 प्रतिशत और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट निर्माण का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश में तैयार हो रहा है। इसके अलावा देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 21 प्रतिशत है। इस मजबूत कृषि आधार को देखते हुए सिंगापुर की खाद्य प्रसंस्करण, उच्चकोटि की पैकेजिंग और वैश्विक निर्यात संबंधी विशेषज्ञता के साथ साझेदारी की असीम संभावनाएं हैं।
इसके साथ ही, महाकुंभ के ऐतिहासिक और सफल आयोजन ने उत्तर प्रदेश की असाधारण प्रबंधन क्षमता को वैश्विक मंच पर सिद्ध कर दिया है। इस अद्वितीय अनुभव को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं, वेलनेस परियोजनाओं और आतिथ्य क्षेत्र के विस्तार से जोड़ा जा रहा है। अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज और बौद्ध सर्किट जैसे धार्मिक व सांस्कृतिक केंद्रों पर विश्वस्तरीय होटल, अत्याधुनिक सम्मेलन केंद्र और टूरिस्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में सिंगापुर की कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
जमीनी स्तर पर धरातल पर उतरे समझौते और नए रोजगार सृजन
बैठक के दौरान निवेश को गति देते हुए मेसर्स ग्रेटर नासिक इन्फ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड को आधिकारिक पात्रता प्रमाणपत्र सौंपा गया। सिंगापुर स्थित यूनिवर्सल सक्सेस एंटरप्राइजेज समूह से जुड़ी इस कंपनी को यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में 775 करोड़ रुपये की लागत से ‘यूनिवर्सल पैकेजिंग हब’ स्थापित करने के लिए 50 एकड़ भूमि के सापेक्ष यह प्रमाणपत्र दिया गया है। इस परियोजना से करीब 1,880 प्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
इसके अतिरिक्त, वैश्विक कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण दिग्गज कंपनी एग्रीकॉर्प इंटरनेशनल के साथ भी समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान हुआ, जो सोया प्रोटीन आइसोलेट और चना प्रोटीन कंसंट्रेट के उत्पादन हेतु अत्याधुनिक विनिर्माण इकाई लगाएगी। वहीं, कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय ग्लोबल कंपनी ब्लू प्लैनेट एनवायरनमेंटल सॉल्यूशंस के साथ हुए समझौतों के तहत नोएडा और सहारनपुर में आधुनिक प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे पर्यावरण सुधार के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार भी सुनिश्चित होगा।
वैश्विक निवेशकों द्वारा उत्तर प्रदेश की नीतियों की सराहना
सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के चेयरमैन मार्क ली के नेतृत्व में आए इस प्रतिनिधिमंडल ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों का प्रत्यक्ष दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के मजबूत बुनियादी ढांचे, कारोबार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) और निवेश-अनुकूल नीतियों की मुक्तकंठ से सराहना की। सदस्यों ने ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में विकसित हो रही फिल्म सिटी, टॉय पार्क, अपैरल पार्क और सेमीकंडक्टर क्लस्टर को वैश्विक निवेशकों के लिए एक स्वर्णिम अवसर करार दिया। यह ऐतिहासिक उच्चस्तरीय सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेशकों के लिए असीम संभावनाओं की नई भूमि बन चुका है।
















































