लखनऊ: अयोध्या स्थित भव्य श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे में कथित गबन का मामला अब गरमाती सियासत का केंद्र बन गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस संवेदनशील प्रकरण को लेकर भारतीय जनता पार्टी और प्रदेश सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोला है। सपा प्रमुख ने दावा किया कि मंदिर के चढ़ावे में हुई हेराफेरी में सत्ताधारी दल और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका अब पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को धार्मिक आस्था के साथ किया गया अक्षम्य विश्वासघात करार देते हुए कहा कि आगामी चुनाव भाजपा के खिलाफ धर्म रक्षा की एक निर्णायक लड़ाई साबित होगा।
‘धर्म धन की चोरी अक्षम्य अपराध और पाप’: सपा प्रमुख
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया साझा करते हुए जांच के निष्कर्षों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने उल्लेख किया कि अयोध्या धाम के मंदिर में दान राशि की हेराफेरी की शुरुआती सतही जांच के दौरान ही चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जहां गड़बड़ी का प्रतिशत 70 से 50 फीसदी आगे बढ़कर 105 प्रतिशत तक पहुंच गया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि प्रशासन और सरकारी संरक्षण के साए में ‘धर्म धन की चोरी’ जैसा घोर अधर्मी कृत्य अंजाम दिया गया है, जो न केवल कानूनी दृष्टिकोण से संगीन अपराध है, बल्कि धार्मिक और नैतिक दृष्टि से भी एक अक्षम्य पाप है।
‘वैश्विक स्तर पर सनातन समाज की आस्था को पहुंचा आघात’
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इस प्रकरण में शामिल चेहरों और उनके राजनीतिक संपर्कों की चर्चा आज अयोध्या के जन-जन की जुबान पर है। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने सनातन संस्कृति और मंदिर के विकास की भावना से अपनी गाढ़ी कमाई का धन दान स्वरूप समर्पित किया था। लेकिन उस पावन राशि को चुराकर कुछ लोगों ने निजी तिजोरियां भरने का काम किया। यादव ने कहा कि इस घटनाक्रम से आम जनमानस का भरोसा पूरी तरह टूट गया है और प्रदेश, देश सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सत्ताधारी दल की भारी किरकिरी हो रही है। इसी के चलते धर्म-परायण लोगों ने सत्ता से इस दल को बेदखल करने का संकल्प ले लिया है, जिससे अगला मुकाबला वास्तव में एक धर्म युद्ध का रूप लेगा।
जून माह में उजागर हुआ था घोटाला, 8 लोग हो चुके हैं गिरफ्तार
गौरतलब है कि राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी और चोरी का यह गंभीर मामला जून के प्रथम सप्ताह में उजागर हुआ था। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने 13 जून को पूरे मामले की पड़ताल के लिए विशेष अन्वेषण दल (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी द्वारा 23 जून को प्रस्तुत की गई प्राथमिक जांच आख्या के आधार पर 25 जून को विधिवत प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में लिप्त आठ अभियुक्तों—अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव तथा रमाशंकर यादव उर्फ टीनू यादव को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया था।




















































