नई दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर आरक्षण सुधार की मांग को लेकर युवाओं और छात्रों द्वारा शुरू किए गए आंदोलन पर सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने छात्रों को भरोसा दिलाया है कि भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व उनकी सभी मांगों और चिंताओं पर अत्यंत संवेदनशीलता व गंभीरता के साथ विचार करेगा। लखनऊ में आयोजित एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान उपमुख्यमंत्री ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे युवा प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद यह महत्वपूर्ण घोषणा की।
## छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात, केंद्रीय मंत्री से बैठक तय
आरक्षण सुधार आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता हर्ष दुबे, मृत्युंजय पाठक और शिवा शर्मा सहित अन्य प्रतिनिधियों ने लखनऊ पहुंचकर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से औपचारिक मुलाकात की और अपनी मांगों से संबंधित विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
मुलाकात के बाद उपमुख्यमंत्री ने बताया कि शुक्रवार को जंतर-मंतर पर आयोजित धरना-प्रदर्शन से जुड़ा मांग पत्र प्राप्त हो चुका है, जिसे त्वरित संज्ञान लेते हुए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया गया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि अगले दो दिनों के भीतर छात्र प्रतिनिधियों की मांगों को सीधे केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा और संबंधित केंद्रीय मंत्री के साथ प्रतिनिधिमंडल की एक विशेष बैठक भी सुनिश्चित कराई जाएगी, जिसमें वे स्वयं छात्रों के साथ उपस्थित रहेंगे।
## ‘छात्रों के भविष्य और हितों से नहीं होगा कोई समझौता’
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केंद्र और राज्य सरकार देश के नौजवानों के भविष्य को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में युवाओं और प्रतिभावान छात्रों का अहित नहीं होने दिया जाएगा तथा सरकार समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ने की नीति पर काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि छात्रों के साथ सीधा संवाद स्थापित कर उनकी जायज चिंताओं का समय रहते समाधान निकाला जाए।
## समान विकास और अवसरों की संख्या बढ़ाने की मांग
आंदोलन का पक्ष रखते हुए छात्र नेता हर्ष दुबे ने कहा कि मौजूदा शैक्षणिक परिवेश में विसंगतियां हैं, जहां पढ़ाई का स्तर समान बताए जाने के बावजूद परिणामों में अत्यधिक अंतर दिखाई देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आंदोलन का प्राथमिक उद्देश्य देश के सभी विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता का समान और न्यायसंगत विकास सुनिश्चित करना है, ताकि उच्च और व्यावसायिक शिक्षण पाठ्यक्रमों में हर युवा को आगे बढ़ने के निष्पक्ष अवसर मिल सकें।
छात्रों ने ज्ञापन में मांग की है कि शिक्षा एवं रोजगार के क्षेत्र में अवसरों का दायरा बढ़ाया जाए और नए अवसर सृजित किए जाएं, जिससे किसी भी वर्ग की प्रतिभा के साथ अन्याय न हो और समग्र राष्ट्र का विकास संभव हो सके।





















































