उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में कांग्रेस संगठन को एक बड़ा प्रशासनिक और कानूनी झटका लगा है। जिला प्रशासन ने शहर के ऐतिहासिक घंटाघर क्षेत्र में स्थित नगर कांग्रेस कमेटी के कार्यालय को अपने प्रत्यक्ष नियंत्रण में ले लिया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय से किसी भी प्रकार की न्यायिक राहत न मिलने के बाद प्रशासन ने निर्धारित समय-सीमा बीतते ही यह कड़ी कार्रवाई की। भारी पुलिस सुरक्षा बल के बीच प्रशासनिक अमले ने मौके पर पहुंचकर नजूल भूमि पर बने इस परिसर को पूरी तरह खाली कराकर विधिवत सील कर दिया।
हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, समय सीमा खत्म होते ही कार्रवाई
नजूल भूमि पर बने इस कार्यालय को लेकर नगरपालिका और स्थानीय प्रशासन ने पूर्व में कांग्रेस पदाधिकारियों को नोटिस तामील कराया था। प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिस की मियाद शनिवार को आधिकारिक रूप से पूरी हो गई थी। नोटिस की निर्धारित अवधि के दौरान ही कांग्रेस के पदाधिकारियों ने कार्रवाई से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली थी, लेकिन अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद उनकी याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। न्यायिक संरक्षण न मिलने के कारण प्रशासन के लिए परिसर को अपने कब्जे में लेने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया।
घंटाघर क्षेत्र में भारी फोर्स की तैनाती, शांतिपूर्वक हुआ कब्जा
शनिवार को नोटिस की अवधि समाप्त होते ही प्रशासनिक अधिकारियों की एक संयुक्त टीम घंटाघर क्षेत्र स्थित कांग्रेस कार्यालय पहुंची। इस टीम में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सदर जनार्दन प्रसाद, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) विकास कुमार, तहसीलदार सदर अजीत जायसवाल और क्षेत्रीय लेखपाल अंजनी कुमार मुख्य रूप से उपस्थित रहे। किसी भी संभावित विरोध या कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था। टीम ने पाया कि कार्यालय का परिसर पहले से ही खाली था, जिसके बाद अधिकारियों ने पंचनामा भरकर इमारत पर प्रशासन का ताला और सील लगा दी।
स्वामित्व का कोई पुख्ता दस्तावेज नहीं दिखा सके कांग्रेसी
उपजिलाधिकारी सदर जनार्दन प्रसाद ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि जिस भूखंड पर कार्यालय बना था, वह पूरी तरह से नजूल संपत्ति के अंतर्गत आता है। प्रशासन ने कांग्रेस पदाधिकारियों को नजूल भूमि से संबंधित अपनी आपत्ति और मालिकाना हक के प्रमाण दर्ज कराने के लिए 15 दिनों का वैधानिक समय दिया था। हालांकि, निर्धारित समय के भीतर कांग्रेस संगठन की तरफ से कोई भी ठोस या वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके उपरांत नगरपालिका की ओर से बेदखली का नोटिस जारी किया गया था, जिसके खिलाफ वे अदालत गए थे।
कमरे मिले पूरी तरह खाली, प्रशासन ने लिया नियंत्रण
एसडीएम सदर ने स्पष्ट किया कि जब प्रशासनिक दस्ता मौके पर पहुंचा, तो भवन के अंदर कोई भी फर्नीचर, रिकॉर्ड या अन्य सामान मौजूद नहीं था। पूरी इमारत पहले से ही खाली कर दी गई थी। प्रशासन ने नियमानुसार पूरी प्रक्रिया को अंजाम देते हुए नजूल संपत्ति को नगरपालिका के अधीन कर लिया है और परिसर की निगरानी बढ़ा दी है।














































