उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की जनता को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि राज्य में चीनी का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरों या अफवाहों पर ध्यान न दें और बिल्कुल भी परेशान न हों। शासन ने साफ कर दिया है कि प्रदेश में उपभोक्ताओं के लिए मिठास की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक महकमे को सख्त निर्देश दिए हैं कि चीनी की उपलब्धता का बहाना बनाकर भ्रम फैलाने वालों और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
## प्रदेश के पास है 179.38 लाख क्विंटल का विशाल भंडार
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के समक्ष जो आंकड़े प्रस्तुत किए गए, वे प्रदेश में चीनी की प्रचुर उपलब्धता को प्रमाणित करते हैं। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश की विभिन्न चीनी मिलों के पास कुल 179.38 लाख क्विंटल चीनी का सुरक्षित स्टॉक उपलब्ध है। इस कुल भंडार में से सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलों में 23.60 लाख क्विंटल, राज्य निगम की मिलों में 5.28 लाख क्विंटल तथा निजी क्षेत्र की चीनी मिलों में सर्वाधिक 150.50 लाख क्विंटल चीनी मौजूद है। इसके अलावा, महज दो महीने (जून और जुलाई) के भीतर ही चीनी मिलों द्वारा 235 लाख क्विंटल चीनी की शानदार बिक्री की गई है, जिसका एक बड़ा हिस्सा अभी भी खुले बाजार में उपभोक्ताओं के लिए आसानी से उपलब्ध है।
## आवश्यकता पड़ने पर 15 अक्टूबर से चलेंगी मिलें
भविष्य की मांग और त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने दूरदर्शी कदम उठाए हैं। सीएम योगी ने संबंधित अधिकारियों और मिल प्रबंधनों को निर्देशित किया है कि यदि बाजार में मांग बढ़ती है या किसी भी स्तर पर आवश्यकता महसूस होती है, तो प्रदेश की चीनी मिलों का संचालन 15 अक्टूबर से ही अनिवार्य रूप से शुरू कर दिया जाए। इससे नई चीनी की आवक समय से पहले ही बाजार में सुनिश्चित हो सकेगी।
## स्टॉक लिमिट तय: नियमों के उल्लंघन पर होगी जेल
बाजार में चीनी के दामों को स्थिर रखने और कृत्रिम कमी (आर्टिफिशियल शॉर्टेज) को रोकने के लिए राज्य सरकार ने भारत सरकार के दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू किया है। इसके तहत अब कोई भी डीलर या व्यापारी 30 दिन से अधिक के चीनी स्टॉक का भंडारण नहीं कर सकेगा। साथ ही, एक समय में किसी भी व्यापारी को 400 टन से ज्यादा का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी।
प्रतिमाह 10 मीट्रिक टन खपत वाले बल्क कंज्यूमर्स (थोक उपभोक्ता) भी अधिकतम 15 दिन का ही स्टॉक अपने पास रख सकेंगे। चीनी मिलों पर भी नकेल कसी गई है; वे अपने निर्धारित मासिक कोटे के तहत बेची गई चीनी को बिक्री की तारीख से 7 दिन के बाद तक अपने गोदामों में रोक कर नहीं रख सकती हैं।
## जिलाधिकारियों को ग्राउंड जीरो पर सत्यापन के निर्देश
मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों (डीएम) को इस व्यवस्था की कड़ी निगरानी का जिम्मा सौंपा है। उन्होंने आदेश दिया है कि जनपद की सभी पंजीकृत चीनी मिलों, थोक और फुटकर विक्रेताओं के गोदामों का तत्काल प्रभाव से भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) कराया जाए। वास्तविक स्टॉक की रिपोर्ट सीधे शासन को भेजी जाएगी। यदि कोई भी व्यापारी निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक रखता है या जमाखोरी करता पाया जाता है, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मूल्यवृद्धि की किसी भी स्थिति में तुरंत शासन को अलर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
## आगामी सत्र का खाका: 90 लाख टन उत्पादन का अनुमान
बैठक के दौरान राज्य के आगामी पेराई सत्र (2026-27) की रूपरेखा भी साझा की गई। इस सत्र के लिए प्रदेश में करीब 28.14 लाख हेक्टेयर गन्ने का क्षेत्रफल संभावित है, जिससे बंपर 90 लाख टन चीनी के उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है। उल्लेखनीय है कि पूरे उत्तर प्रदेश में चीनी की अनुमानित मासिक खपत लगभग 4 लाख टन है, जिसके मुकाबले उत्पादन कहीं अधिक रहने वाला है। वहीं, किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए पेराई सत्र 2025-26 में अब तक 48 लाख गन्ना किसानों को 32,554 करोड़ रुपये से भी अधिक का रिकॉर्ड भुगतान सफलतापूर्वक किया जा चुका है।





















































