उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित विभागीय पदोन्नति परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के ज़रिए नकल और धांधली के गंभीर आरोपों के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय सख्त रुख अपना चुका है। हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड को कड़ा निर्देश जारी करते हुए हेड कॉन्स्टेबल (मोटर परिवहन) के पद पर प्रोमोशन के लिए आयोजित परीक्षा में शामिल हुए सभी 176 उम्मीदवारों का संपूर्ण परिणाम और मेरिट ब्यौरा अदालत के सामने पेश करने का हुक्म दिया है। अदालत का यह आदेश परीक्षा में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं को उजागर करने के परिप्रेक्ष्य में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांस्टेबल चालकों ने याचिका दाखिल कर परीक्षा रद्द करने की मांग की
न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ में यह महत्वपूर्ण सुनवाई कांस्टेबल वाहन चालकों (ड्राइवरों) की ओर से दायर एक याचिका पर हुई। याचिकाकर्ताओं ने हेड कॉन्स्टेबल (एमटी) पद पर पदोन्नति हेतु 5 अक्टूबर 2025 को आयोजित की गई विभागीय परीक्षा में बड़े स्तर पर नकल होने का आरोप लगाया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अभ्यर्थियों ने परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और मोबाइल फोन का बेधड़क इस्तेमाल किया। इन अनियमितताओं का हवाला देते हुए अभ्यर्थियों ने अदालत से मांग की है कि पूरी विभागीय परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और इसे पूरी निष्पक्षता व सख्त निगरानी के बीच दोबारा कराया जाए। इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ताओं ने बाद में जारी परिणामों तथा प्रैक्टिकल और तकनीकी दक्षता परीक्षा के आधार पर किए गए चयन को भी चुनौती दी है।
सिटिंग प्लान का ब्यौरा भी तलब, 13 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
उच्च न्यायालय ने भर्ती बोर्ड को न केवल सभी 176 अभ्यर्थियों की रिजल्ट शीट पेश करने का निर्देश दिया है, बल्कि चयनित उम्मीदवारों की परीक्षा केंद्र पर बैठने की व्यवस्था (सिटिंग प्लान) की पूरी जानकारी भी तलब की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आगे के विवाद को सुलझाने और वास्तविकता का पता लगाने के उद्देश्य से परीक्षा प्रक्रिया की संपूर्ण रिकॉर्डिंग की जांच करने के निर्देश दिए हैं। मामले में अगली कानूनी कार्यवाही और सुनवाई के लिए 13 अगस्त की तारीख तय की गई है।
बोर्ड का दावा बनाम अदालत में खुली असलियत
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के निर्देश पर उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की अपर पुलिस अधीक्षक मोहिनी पाठक अदालत में उपस्थित हुईं। उन्होंने तर्क दिया कि प्रोमोशन परीक्षा के नतीजे घोषित किए जा चुके थे, किंतु उन्हें वेबसाइट पर पूरी तरह अपलोड करने के बजाय उम्मीदवारों के निजी लॉगिन पर देखने की सुविधा दी गई थी। शुरुआती दौर में पुलिस भर्ती बोर्ड के अधिकारियों ने उच्च न्यायालय को यह बताया था कि जांच के दौरान सिर्फ 2 अभ्यर्थी ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते पकड़े गए थे और बाकी उम्मीदवारों के पास कोई आपत्तिजनक या इलेक्ट्रॉनिक सामान नहीं मिला था।
जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा: 115 अभ्यर्थी अयोग्य घोषित
अदालत के कड़े रुख और विस्तृत जांच के आदेश के बाद मामले में एक बहुत बड़ा मोड़ आया। 22 जुलाई को कोर्ट में पेश हुई अपर पुलिस अधीक्षक मोहिनी पाठक ने खुद यह जानकारी साझा की कि व्यापक स्तर पर की गई जांच में 115 अभ्यर्थियों को अनियमितताओं और अनुचित साधनों का दोषी पाया गया है। इसके बाद इन सभी 115 अभ्यर्थियों को अयोग्य घोषित (डिसक्वालिफाई) कर दिया गया। शुरुआती जांच में 2 अभ्यर्थियों से शुरू हुई गड़बड़ी की संख्या का सीधे 115 तक पहुंच जाना विभागीय प्रोमोशन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हुई सेंधमारी की तरफ इशारा करता है।





















































