संसद के वर्तमान सत्र में जारी गतिरोध के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी दलों के बीच जुबानी जंग और अधिक तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा विपक्ष को संसद में हर मुद्दे पर चर्चा की खुली चुनौती देने के बाद अब समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मोर्चा खोल दिया है। गृह मंत्री के बयान पर पलटावार करते हुए सपा मुखिया ने केंद्र सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ दल असल में जनता से जुड़े संवेदनशील विषयों पर कोई सार्थक जवाब देने के बजाय संसद सत्र को जल्द से जल्द खत्म करने की फिराक में है।
अमित शाह की विपक्ष से अपील और चर्चा का प्रस्ताव
संसदीय कार्यवाही में बने हुए लगातार व्यवधान को दूर करने के उद्देश्य से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के सामने एक निश्चित समय-सारणी का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के पास किसी भी मुद्दे पर छिपाने के लिए कुछ नहीं है और वह हर विषय पर बहस के लिए पूरी तरह तैयार है। गृह मंत्री ने विपक्षी दलों को सुझाव दिया कि वे लोकसभा अध्यक्ष को औपचारिक पत्र सौंपकर चर्चा की मांग करें। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट समय सीमा का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार बुधवार दोपहर तीन बजे से लेकर देर रात तक और अगले दिन यानी गुरुवार दोपहर तीन बजे तक लगातार बहस कराने को राजी है। शाह ने यह भी याद दिलाया कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही नीट (NEET) परीक्षा से जुड़े विवादित मुद्दे पर चर्चा का आश्वासन दे चुके हैं।
समय-सीमा तय करना अलोकतांत्रिक: सपा प्रमुख
गृह मंत्री अमित शाह के इस बयान पर प्रतिक्रिया देने में अखिलेश यादव ने ज़रा भी देरी नहीं की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी राय व्यक्त करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार के इस कदम को लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ करार दिया। अखिलेश यादव ने लिखा कि संसद में उत्तर देने के लिए सरकार द्वारा समय की सीमा निर्धारित करना अपने आप में ही अलोकतांत्रिक रवैये को दर्शाता है। उनके अनुसार, इस तरह की तय शर्तों के भीतर दिया गया उत्तर केवल एक ‘थोथा बयान’ बनकर रह जाएगा, जिसमें गहराई और जवाबदेही का पूर्ण अभाव होगा।
सत्र समाप्त करने की उतावली में भाजपा
सपा अध्यक्ष ने सत्तारूढ़ पार्टी पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा असल में किसी भी सवाल का ठोस और संतोषजनक समाधान देना ही नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि सरकार केवल औपचारिकताओं की पूर्ति कर संसदीय सत्र का समय से पहले समापन करने के लिए उतावली नजर आ रही है। अखिलेश के मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही और उत्तरदायित्व समय की किसी शर्त से बंधे नहीं होते, बल्कि वे तर्क और जनहित की भावना से निभाए जाते हैं।
देश भाषण नहीं, ठोस जवाब चाहता है
विपक्ष की ओर से हमला जारी रखते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि यह मामला केवल किसी सामान्य जिज्ञासा को शांत करने का नहीं है, बल्कि यह बेहद संवेदनशील और गंभीर विषय है। उन्होंने कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि वर्तमान स्थिति ‘भगवान और इंसान’ दोनों के साथ दुर्व्यवहार तथा दुर्भावना से भरी हुई है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सपा प्रमुख ने दोटूक कहा कि देश की जनता अब किसी का केवल भाषण सुनने के मूड में बिल्कुल नहीं है, बल्कि वह सरकार से सीधा, स्पष्ट और ठोस जवाब चाहती है।





















































