पावन सावन मास की शुरुआत: शिवमय हुआ पूरा उत्तर प्रदेश
सनातन संस्कृति में विशेष धार्मिक महत्व रखने वाले पवित्र सावन महीने का शुभारंभ हो चुका है। इस पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र अछूते नहीं रहे, बल्कि राज्यभर के शिवालयों में आस्था का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। सावन के पहले दिन मंगलवार को सुबह के सूरज की पहली किरण के साथ ही मंदिरों के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया। भगवान आशुतोष के जयकारों से पूरा प्रदेश गूंज उठा और हर तरफ भक्तिरस की धारा बहती नजर आई।
राजधानी क्षेत्र से लेकर तीर्थनगरी अयोध्या और आध्यात्मिक नगरी वाराणसी तक, हर जगह शिवभक्तों का उत्साह चरम पर था। प्रशासन द्वारा की गई चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच लोग कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखे।
अयोध्या के नागेश्वरनाथ मंदिर में उमड़ी भारी भीड़
भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में स्थित ऐतिहासिक नागेश्वरनाथ मंदिर में सावन के पहले दिन सुबह से ही भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। सरयू नदी के पावन तटों पर आस्था की डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालुओं ने प्राचीन नागेश्वरनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई।
दिल्ली से विशेष तौर पर पहुंचे श्रद्धालु सुनील पांडे ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे इस पावन प्रथम दिन बाबा नागेश्वरनाथ के दर्शन के लिए खासतौर पर आए हैं। उन्होंने सरयू स्नान के बाद शिवलिंग का जलाभिषेक किया और इसके उपरांत हनुमानगढ़ी के दर्शन की योजना बनाई। पांडे के अनुसार, भगवान शिव अपने भक्तों पर अति शीघ्र कृपा बरसाने वाले देव हैं और सच्ची निष्ठा से की गई आराधना कभी निष्फल नहीं होती।
स्थानीय निवासी और नियमित दर्शनार्थी गणेश गोस्वामी ने मंदिर की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नागेश्वरनाथ मंदिर की ख्याति केवल देश में ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर फैली हुई है। उन्होंने बताया कि इस विशेष दिन पर उमड़ने वाली भीड़ भोलेनाथ के प्रति लोगों की अटूट आस्था का प्रमाण है। मंदिर परिसर में मौजूद एक अन्य महिला श्रद्धालु ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि सावन मास में यहां का आध्यात्मिक वातावरण मन को असीम शांति प्रदान करता है।
काशी विश्वनाथ दरबार में गूंजा हर-हर महादेव का उद्घोष
वाराणसी में विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में भी सावन के पहले दिन का नजारा देखते ही बनता था। बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से शिवभक्त पहुंचे थे। पंजाब के अमृतसर से पहली बार काशी आए एक श्रद्धालु ने अपनी यात्रा का संस्मरण सुनाते हुए कहा कि उन्हें एक सप्ताह पूर्व ही बाबा के दरबार में आने की आंतरिक प्रेरणा मिली थी। यहां पहुंचकर उन्हें जो अलौकिक आनंद प्राप्त हुआ, उसे शब्दों में बयां करना कठिन है। उन्होंने देशवासियों को सावन मास की शुभकामनाएं देते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए किए गए प्रबंधों की खुले मन से सराहना की।
एक अन्य स्थानीय भक्त ने बताया कि सावन का यह पूरा महीना भगवान भोलेनाथ को समर्पित होता है और आज से शुरू हुए इस धार्मिक अनुष्ठान का प्रभाव आने वाले दिनों में और अधिक व्यापक होगा। भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक तैयारियां पूरी तरह मुस्तैद नजर आईं, जिससे श्रद्धालुओं को बिना किसी बाधा के बाबा के दर्शन प्राप्त हुए।





















































