उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ती एक अनोखी और प्रेरणादायी शादी की दास्तान सामने आई है। रानीनागल गांव में एक विधवा महिला और अकेले जीवन बिता रहे व्यक्ति ने तमाम पारिवारिक विरोधों को दरकिनार करते हुए एक-दूजे का हाथ थाम लिया है। 3 बच्चों की मां तबस्सुम और 6 बच्चों के पिता मोहम्मद उमर ने कानूनी और धार्मिक रीति-रिवाजों से निकाह कर एक नई शुरुआत की है। अब माता-पिता और कुल 9 बच्चों को मिलाकर 11 सदस्यों का यह बड़ा परिवार एक ही छत के नीचे नई जिंदगी की शुरुआत कर रहा है।
दर्द और अकेलेपन के बीच पनपा जीवनभर का साथ
रानीनागल क्षेत्र की रहने वाली तबस्सुम के पति रियाजुल की लगभग 5 वर्ष पूर्व एक भीषण सड़क हादसे में असामयिक मृत्यु हो गई थी। इसके बाद से वह अपने तीन मासूम बच्चों की परवरिश की खातिर ससुराल में ही रहकर संघर्ष कर रही थीं। इसी दौरान उनकी पहचान कोरबांकू निवासी मोहम्मद उमर से हुई, जो पेशे से मोटर मैकेनिक का काम करते हैं। उमर की पहली पत्नी उन्हें छोड़कर जा चुकी थीं और उन्होंने दूसरी शादी कर ली थी। पारिवारिक संकट और अकेलेपन के दौर से गुजर रहे दोनों लोगों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे आत्मीयता और जीवनभर साथ निभाने के मजबूत संकल्प में बदल गया।
परिवार के विरोध पर कलियर शरीफ में निकाह और कोर्ट मैरिज
जब दोनों ने विवाह करने की इच्छा जताई, तो परिजनों और रिश्तेदारों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया। सामाजिक बंदिशों को देखते हुए तबस्सुम और उमर ने परिजनों की गैरमौजूदगी में पहले पिरान कलियर शरीफ जाकर धार्मिक रीति से निकाह संपन्न किया और इसके पश्चात कानूनी मान्यता के लिए कोर्ट मैरिज भी कर ली। जैसे ही इस गुप्त निकाह की जानकारी परिजनों को हुई, परिवार में भारी हंगामा और विवाद खड़ा हो गया।
ग्राम प्रधान की अगुवाई में बैठी पंचायत, उमर ने दिया कानूनी हलफनामा
विवाद को शांत करने के लिए ग्राम प्रधान जाहिद हुसैन की अध्यक्षता में गांव में एक सार्वजनिक पंचायत बुलाई गई। पंचायत की बैठक में ससुराल पक्ष ने तबस्सुम से सारे संबंध समाप्त करने की बात रखी। वहीं जब पंचायत के संभ्रांत लोगों ने दोनों पक्षों से उनका पक्ष जानना चाहा, तो तबस्सुम और उमर ने अडिग रहते हुए साफ लफ्जों में कहा कि वे बालिग हैं, उन्होंने अपनी मर्जी से यह फैसला लिया है और वे अब किसी भी कीमत पर अलग नहीं होंगे।
इसके बाद मोहम्मद उमर ने पंचायत के समक्ष तबस्सुम और उनके तीनों बच्चों के लालन-पालन का संपूर्ण दायित्व उठाने का लिखित भरोसा दिया। उन्होंने किराए के आवास, खरीदे गए भूखंड और सभी बच्चों के भरण-पोषण से संबंधित औपचारिक शपथ पत्र (हलफनामा) भी पंचायत में प्रस्तुत किया।
9 बच्चों के सुनहरे भविष्य की संभाली कमान
पंचायत की औपचारिक सहमति और फैसले के बाद तबस्सुम ने अपना सामान समेटा और अपने तीनों बच्चों को साथ लेकर पति उमर के साथ नए घर के लिए रवाना हो गईं। अब उमर के 6 बच्चे और तबस्सुम के 3 बच्चों को मिलाकर घर में कुल 9 बच्चे हो गए हैं। पूरे इलाके में यह विवाह चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है। ग्रामीण इस बात की प्रशंसा कर रहे हैं कि दोनों ने अपने अतीत के दुखों को भुलाकर न सिर्फ एक-दूसरे को सहारा दिया, बल्कि 9 मासूमों के भविष्य को संवारने का साहसिक बीड़ा भी उठाया है।





















































