उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के श्रमिक वर्ग और आम नागरिकों को उन्नत चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। सोमवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के तीन बड़े जिलों— गोरखपुर, मुरादाबाद और वाराणसी के स्वास्थ्य ढांचे को पूरी तरह बदलने वाले प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई है। इस कल्याणकारी फैसले के तहत राज्य सरकार भारत सरकार को निशुल्क और विशेष रियायती दरों पर बेशकीमती जमीनें आवंटित करेगी, जिससे बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो सके।
मुरादाबाद में 3.5 लाख से अधिक लोगों को मिलेगा सीधा फायदा
कैबिनेट के इन महत्वपूर्ण फैसलों की विस्तृत जानकारी देते हुए उत्तर प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने मीडिया को बताया कि मुरादाबाद और उसके आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों मजदूर परिवारों के लिए यह निर्णय एक संजीवनी की तरह साबित होगा। मुरादाबाद के हरथला गांव में 100 बेड वाले कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) अस्पताल के निर्माण का मार्ग पूरी तरह साफ हो गया है।इसके लिए राज्य सरकार अपनी 2.025 हेक्टेयर भूमि भारत सरकार को बिना किसी शुल्क के यानी पूरी तरह मुफ्त हस्तांतरित करेगी। इस अत्याधुनिक अस्पताल के बन जाने से क्षेत्र के लगभग 93,591 बीमांकित श्रमिकों और उनके आश्रित करीब 3,55,646 परिजनों को घर के पास ही विश्वस्तरीय और मुफ्त इलाज की सुविधा मिलने लगेगी।
गोरखपुर के ‘गीडा’ में रियायती दरों पर आवंटित होगी 5 एकड़ से अधिक जमीन
मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर को भी इस योजना के तहत बड़ी सौगात मिली है। गोरखपुर के औद्योगिक गलियारे ‘गीडा’ (GIDA) के सेक्टर-09 में भी 100 शय्याओं (बेड) वाले एक और सर्वसुविधायुक्त ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना की जाएगी।इस महत्वपूर्ण परियोजना को रफ्तार देने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा वित्तीय नीतिगत फैसला लिया है। अस्पताल के लिए चिन्हित की गई लगभग 5.249 एकड़ भूमि की सरकारी दर, जो सामान्यतः 8,720 रुपए प्रति वर्ग मीटर निर्धारित थी, उसे भारी कटौती करते हुए विशेष रियायती दर मात्र 2,000 रुपए प्रति वर्ग मीटर तय किया गया है। जमीन की लागत कम होने से अस्पताल का बुनियादी ढांचा बेहद तेजी से तैयार हो सकेगा।
वाराणसी में बनेगा भव्य ESIC मेडिकल कॉलेज, श्रमिकों के बच्चों के लिए 50% सीटें आरक्षित
श्रम मंत्री अनिल राजभर ने वाराणसी को लेकर की गई सबसे बड़ी घोषणा का ब्योरा साझा करते हुए बताया कि बाबा विश्वनाथ की नगरी में एक भव्य ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए वाराणसी की पिंडरा तहसील के अंतर्गत आने वाले पिंडरा गांव में लगभग 13 एकड़ भूमि भारत सरकार को पूरी तरह निशुल्क (फ्री ऑफ कॉस्ट) प्रदान की जाएगी।यह मेडिकल कॉलेज न केवल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करेगा, बल्कि चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में स्थानीय युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार भी खोलेगा। इस कॉलेज में दाखिले की प्रक्रिया को लेकर भी बेहद कल्याणकारी आरक्षण फॉर्मूला तैयार किया गया है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश के मूल निवासियों और विशेष रूप से मजदूर परिवारों के बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी।
समझें मेडिकल कॉलेज में दाखिले का पूरा कोटा गणित
वाराणसी में बनने वाले इस ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस (MBBS) सीटों के आवंटन के लिए बेहद पारदर्शी और न्यायसंगत व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था के अंतर्गत प्रवेश की शर्तें और कोटे का वर्गीकरण निम्नलिखित प्रकार से होगा:
- श्रमिकों के बच्चों के लिए विशेष सुरक्षा: कॉलेज की कुल उपलब्ध एमबीबीएस सीटों में से 50 प्रतिशत सीटें सीधे तौर पर बीमित श्रमिकों (Insured Workers) के मेधावी बच्चों के लिए आरक्षित रखी जाएंगी।
- राज्य सरकार का कोटा: इसके अतिरिक्त, 18 प्रतिशत सीटों पर उत्तर प्रदेश राज्य सरकार की काउंसलिंग व्यवस्था के माध्यम से मेधावी छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा।
- केंद्र सरकार का कोटा: शेष 7 प्रतिशत सीटों पर केंद्र सरकार के निर्धारित कोटे और नियमों के तहत देश भर के अभ्यर्थियों को दाखिला मिल सकेगा।
इस प्रकार, इस कॉलेज की अधिकतम सीटों का सीधा लाभ उत्तर प्रदेश के ही चिकित्सा शिक्षा के अभ्यर्थियों को प्राप्त होगा। इन सभी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य पूरी तरह से कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) द्वारा अपनी प्रत्यक्ष देखरेख में कराया जाएगा, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और समयसीमा सुनिश्चित की जा सके।





















































