उत्तर प्रदेश की पावन धार्मिक नगरी वाराणसी और त्रिवेणी संगम की धरती प्रयागराज में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा के उत्सव का शुभारंभ अत्यंत हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ हुआ। धर्म की राजधानी काशी में भोर की पहली किरण के साथ ही रथ यात्रा मेले का आगाज हुआ, जिससे पूरा वातावरण भक्ति के रस में सराबोर हो गया। डमरूओं की गूंज, शंखों की ध्वनि और ‘जय जगन्नाथ’ के उद्घोष के बीच हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए। वहीं दूसरी ओर, तीर्थराज प्रयागराज में भी इस पावन अवसर पर सुबह से ही पवित्र त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने के लिए भक्तों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। दोनों ही सांस्कृतिक केंद्रों में भगवान जगन्नाथ की आराधना को लेकर अद्वितीय उत्साह देखने को मिल रहा है।
काशी में मंगला आरती से हुआ मेले का श्रीगणेश, डमरू की थाप पर झूमे भक्त
वाराणसी में विश्वप्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा मेले की शुरुआत परंपरा के अनुसार अति तड़के मंगला आरती के साथ की गई। जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, शंखनाद और डमरू दल की गूंज से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। इस अलौकिक दृश्य का साक्षी बनने के लिए भोर से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई थीं।
इस मुख्य धार्मिक अनुष्ठान में जगन्नाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष बृजेश सिंह और सचिव शैलेश त्रिपाठी सहित प्रबंध समिति के तमाम पदाधिकारी मौजूद रहे। आरती के संपन्न होने के बाद आम भक्तों के लिए दर्शन की व्यवस्था शुरू की गई। मंदिर प्रशासन ने भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमाओं के दर्शन के लिए विशेष प्रबंध किए हैं।
भक्तों की सुरक्षा सर्वोपरि, ट्रस्ट ने किए अभूतपूर्व इंतजाम
इस वर्ष मेले की भव्यता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। जगन्नाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष बृजेश सिंह ने इस मौके पर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ का यह पर्व सबके जीवन में खुशहाली लाता है। उन्होंने समस्त भक्तों से अपील की कि वे भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने परिवार की सुख, शांति और समृद्धि की मंगल कामना करें।
अध्यक्ष ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि पिछले वर्ष के अनुभवों को देखते हुए इस बार श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, विश्राम और धूप से बचने के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाएं जुटाई गई हैं। परिसर की आकर्षक सजावट इस बार के मेले का मुख्य आकर्षण केंद्र बनी हुई है।
मेले की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर बात करते हुए ट्रस्ट के सचिव शैलेश त्रिपाठी ने जानकारी दी कि इस बार के लेआउट में कई तकनीकी और व्यावहारिक बदलाव किए गए हैं। दर्शन मार्ग को इस तरह से नियोजित किया गया है कि कहीं भी भीड़ का दबाव न बढ़े और भगदड़ जैसी किसी भी अप्रिय स्थिति को पूरी तरह से टाला जा सके। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रशासन और वॉलंटियर्स के सहयोग से इस वर्ष का आयोजन इतिहास में सबसे अधिक भव्य, सुव्यवस्थित और स्मरणीय सिद्ध होगा।
‘साल भर रहता है इस दिन का इंतजार’, काशीवासियों की अटूट आस्था
रथ यात्रा मेले को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में एक अलग ही उल्लास देखने को मिलता है। दर्शन करने पहुंचे स्थानीय श्रद्धालु गणेश मिश्रा ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि काशी के नागरिकों को इस पावन रथ यात्रा का पूरे बारह महीने बड़ी ही बेसब्री से इंतजार रहता है। यह केवल एक धार्मिक मेला नहीं है, बल्कि यह काशी की प्राचीन लोक संस्कृति और जन-जन की अटूट आस्था का जीवंत प्रतीक है।
इसी क्रम में सामाजिक कार्यकर्ता अभिषेक शर्मा ने बताया कि इस ऐतिहासिक मेले में न केवल वाराणसी बल्कि आसपास के जनपदों से भी भारी संख्या में सनातनी हिस्सा लेने आते हैं। सामाजिक स्तर पर भी इस पर्व को लेकर महीनों पहले से तैयारियां शुरू हो जाती हैं, जो काशी की समरसता को दर्शाती हैं।
प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर आस्था की डुबकी, सनातन कल्याण की प्रार्थना
दूसरी तरफ, न्याय की नगरी प्रयागराज में भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के पावन उपलक्ष्य पर अद्भुत दृश्य देखने को मिला। सूर्योदय के साथ ही पवित्र गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम तट पर श्रद्धालुओं का तांता लग गया। हजारों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने संगम के शीतल जल में आस्था की डुबकी लगाई और सूर्य देव को अर्घ्य दिया।
संगम तट पर स्नान करने आए एक श्रद्धालु ने बताया कि आज भगवान जगन्नाथ नगर भ्रमण पर निकलेंगे, इसलिए वे सबसे पहले मां गंगा का आशीर्वाद लेने आए हैं। इसके पश्चात वे पूरे परिवार के साथ भगवान जगन्नाथ की मुख्य रथ यात्रा में सम्मिलित होंगे। श्रद्धालु ने भगवान से प्रार्थना की कि संपूर्ण संसार के सभी प्राणी निरोगी रहें, हिंदू समाज में एकता बनी रहे और वैश्विक पटल पर सनातन धर्म की कीर्ति निरंतर पताका फहराती रहे।
तट पर मौजूद अन्य श्रद्धालुओं ने भी विधि-विधान से गंगा पूजन और आरती संपन्न की। भक्तों का कहना था कि पवित्र त्रिवेणी स्नान के पश्चात भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने का सौभाग्य मिलना परम मोक्ष की प्राप्ति जैसा है। वाराणसी से लेकर प्रयागराज तक, पूरा पूर्वी उत्तर प्रदेश इस समय पूरी तरह से भक्तिमय हो चुका है और हर तरफ केवल धार्मिक अनुष्ठानों की धूम दिखाई दे रही है।





















































