उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जनपद में कानून-व्यवस्था और चिकित्सा परिसरों की सुरक्षा को गंभीर चुनौती देने वाला एक बेहद शर्मनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। थाना चौक कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज की डायलिसिस यूनिट उस वक्त रणक्षेत्र में तब्दील हो गई, जब वहां इलाज करा रहे एक मरीज के परिजनों ने साथियों के साथ मिलकर ड्यूटी पर तैनात प्रशिक्षु नर्सों के साथ अमानवीय हदें पार कर दीं। आरोपियों ने न केवल यूनिट के भीतर जमकर तोड़फोड़ और उत्पात मचाया, बल्कि नर्सों को उनके केबिन से बेरहमी से घसीटकर बाहर निकाला और उनके साथ हाथापाई करते हुए एक नर्स को जबरन अपनी कार में खींचकर ले जाने का घृणित प्रयास किया। इस गंभीर घटना के बाद से चिकित्सा जगत और स्थानीय स्तर पर भारी आक्रोश व्याप्त है, और पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया है।
वीडियो बनाने के शक में भड़का विवाद, देखते ही देखते उग्र हो गए तीमारदार
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब राजकीय मेडिकल कॉलेज की डायलिसिस यूनिट में लता सिंह नामक एक मरीज को भर्ती कराकर उनका उपचार किया जा रहा था। इसी दौरान मरीज के साथ आए तीमारदारों (परिजनों) को अचानक यह अनर्गल संदेह हुआ कि वहां मौजूद एक प्रशिक्षु नर्स उनका वीडियो बना रही है। इसी मामूली सी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई।
आरोप है कि आक्रोशित परिजनों ने फौरन आपा खो दिया और प्रशिक्षु नर्स के बाल पकड़कर उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। जब अन्य साथी नर्सों ने बीच-बौवचन करने की कोशिश की, तो उनके साथ भी हाथापाई और अभद्रता की गई। मामला यहीं शांत नहीं हुआ, बल्कि आरोपियों ने फोन कर बाहर से अपने दर्जनों अन्य साथियों को भी मौके पर बुला लिया, जिसके बाद अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया।
केबिन से खींचकर मारपीट और छेड़खानी के गंभीर आरोप, विधायक से जुड़ा नाम आया सामने
घटना की गंभीरता को बयां करते हुए पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित ने बताया कि दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, हमलावरों ने डायलिसिस यूनिट के भीतर घुसकर बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की। उन्होंने नर्सों को उनके अपने केबिन से जबरन बाहर खींचा और उनके साथ शारीरिक हिंसा की। इस दौरान एक प्रशिक्षु नर्स को बलपूर्वक खींचकर बाहर खड़ी कार में डालने का भी कुप्रयास किया गया। पीड़िता द्वारा दी गई लिखित शिकायत में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि उपद्रवियों ने उनके साथ अशोभनीय हरकतें कीं और उनके निजी अंगों को अनुचित तरीके से छुआ।
घटना के तूल पकड़ने के बाद रविवार की शाम पीड़ित प्रशिक्षु नर्सों का एक प्रतिनिधिमंडल शाहजहांपुर की महापौर अर्चना वर्मा से जाकर मिला। उन्होंने अपना दर्द साझा करते हुए गुहार लगाई कि उनकी जान को लगातार खतरा बना हुआ है और आरोपियों तथा उनके समर्थकों द्वारा मुकदमा वापस लेने के लिए उन पर भारी दबाव डाला जा रहा है। इस बीच, सोशल मीडिया पर एक प्रशिक्षु नर्स का वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह दावा कर रही है कि इन हमलावरों का संबंध ददरौल क्षेत्र के एक भाजपा विधायक से है। हालांकि, जब इस संबंध में ददरौल के भाजपा विधायक अरविंद सिंह से प्रतिक्रिया ली गई, तो उन्होंने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया।
पुलिस ने पिता-पुत्र समेत 15-20 अज्ञात पर दर्ज किया मुकदमा, सीसीटीवी खंगाल रही है टीम
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने त्वरित एक्शन लिया है। पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित ने जानकारी दी कि इस मामले में नामजद आरोपियों—अभय प्रताप सिंह और विजय प्रताप सिंह—तथा 15 से 20 अन्य अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़क धाराओं (जैसे 191(2), 115(2), 352, 351(3), 324(4) और 74) के तहत गंभीर मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है।
पुलिस मेडिकल कॉलेज परिसर के भीतर और बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को बारीकी से खंगाल रही है, ताकि अन्य संलिप्त उपद्रवियों की पहचान करके उन्हें जल्द से जल्द कानून के शिकंजे में लिया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।





















































