उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जंक्शन रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की संयुक्त चेकिंग टीम ने एक बेहद शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया है, जो हूबहू असली दिखने वाले नोटों के बंडल के जरिए एक बड़े फ्रॉड नेटवर्क को अंजाम देने की फिराक में था। सुरक्षा बलों ने आरोपी के पास से 50 लाख रुपये अंकित मूल्य के फर्जी नोटों के भारी-भरकम बंडल बरामद किए हैं। इस जब्ती के बाद जंक्शन पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता और बढ़ा दी गई है।
बीकानेर का रहने वाला है आरोपी, दिल्ली से कोलकाता का था रूट
जीआरपी के आधिकारिक अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस गैर-कानूनी गतिविधि में पकड़े गए मुख्य आरोपी की शिनाख्त 20 वर्षीय रामनिवास के रूप में की गई है। वह मूल रूप से राजस्थान के बीकानेर जिले के नापासर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गजरूप देसर गांव का निवासी है।
सुरक्षा बलों द्वारा की गई शुरुआती पूछताछ और तफ्तीश में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि आरोपी इस संदिग्ध खेप को देश की राजधानी दिल्ली के पहाड़गंज इलाके से लेकर चला था। उसका इरादा इस पूरी खेप को पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में डिलीवर करने का था, लेकिन इससे पहले कि वह अपने गंतव्य तक पहुंच पाता, प्रयागराज जंक्शन पर ही सुरक्षा एजेंसियों के चक्रव्यूह में फंस गया।
बैग खोलते ही उड़े सुरक्षा बलों के होश: 500-500 के नोटों के मिले 10 बंडल
जंक्शन पर नियमित जांच के दौरान जब आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीम ने संदिग्ध रूप से घूम रहे रामनिवास को रोका, तो उसकी गतिविधियां संदेहास्पद लगीं। इसके बाद जब उसके पास मौजूद नीले रंग के बैग की सघन तलाशी ली गई, तो सुरक्षाकर्मियों के होश उड़ गए।
बैग के भीतर से 500-500 रुपये के नोटों की शक्ल में तैयार किए गए कुल 10 बड़े बंडल बरामद हुए। जब इन सभी बंडलों की गिनती की गई और उनके ऊपर लिखे विवरण को देखा गया, तो कागजी तौर पर इनका कुल अंकित मूल्य पूरे 50 लाख रुपये आंका गया। इतनी बड़ी रकम को बिना किसी वैध दस्तावेज के ले जाए जाने के कारण पुलिस ने तत्काल उसे हिरासत में ले लिया।
बेहद गंदा खेल: ऊपर-नीचे असली नोट, बीच में सफेद कागज की चालाकी
सुरक्षा एजेंसियों ने जब इन जब्त किए गए बंडलों की बारीकी से फॉरेंसिक और तकनीकी जांच की, तो जालसाजी का एक अनोखा और बेहद शातिर तरीका सामने आया। जांच में पता चला कि यह विशुद्ध रूप से एक बड़ा धोखा था। पकड़े गए शातिर ठग ने नोटों की प्रत्येक गड्डी के सबसे ऊपर और सबसे नीचे 500 रुपये के असली भारतीय नोट लगा रखे थे।
वहीं, गड्डी के बीच के पूरे हिस्से में नोटों के आकार में हूबहू काटे गए सिर्फ सादे सफेद कागज भरे हुए थे। इस पूरे बंडल को पारदर्शी (ट्रांसपेरेंट) प्लास्टिक शीट से इतनी सफाई से पैक किया गया था कि पहली नजर में देखने पर कोई भी धोखा खा जाए और उसे यही लगे कि यह पूरी गड्डी 500 रुपये के कड़क असली नोटों की ही है।
असली नकदी के बदले नकली गड्डियों का अवैध कारोबार
पुलिसिया पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया है कि वह इन नकली और भ्रामक गड्डियों का इस्तेमाल बाजार में सीधे तौर पर लोगों को ठगने के लिए करता था। वह इन फर्जी बंडलों को दिखाकर सीधे-सादे व्यापारियों या शिकार को झांसे में लेता था और उनके बदले में बाजार से असली नकदी ऐंठकर मोटा अवैध मुनाफा कमाता था।
यह पूरा गिरोह किस तरह काम करता है और दिल्ली से कोलकाता के बीच इसके तार किन-किन बड़े सरगनाओं से जुड़े हैं, पुलिस अब इसकी जांच कर रही है। फिलहाल, जीआरपी ने आरोपी रामनिवास के खिलाफ प्रयागराज जीआरपी थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित विभिन्न गंभीर विधिक धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद आरोपी को स्थानीय न्यायालय में पेश कर जेल भेजने की विधिक प्रक्रिया अमल में लाई जा रही है।





















































