उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। शहर में जारी मूसलाधार बारिश के बीच एक शताब्दी पुराना जर्जर मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस भीषण हादसे में दो अबोध बालकों समेत परिवार के 6 सदस्यों की मलबे में दबकर दर्दनाक मौत हो गई। घटना के वक्त घर के सभी सदस्य एक ही कमरे में सो रहे थे। भीषण तबाही के बीच केवल एक युवक ही किस्मत से जिंदा बच सका है, जिसका अस्पताल में इलाज जारी है। इस दिल दहला देने वाली त्रासदी के बाद पूरे नगर कोतवाली इलाके में सन्नाटा और चीख-पुकार का माहौल है।
रात के अंधेरे में काल बनी बारिश और ढह गई जर्जर छत
यह भयानक हादसा प्रतापगढ़ के नगर कोतवाली थाना अंतर्गत महुली मोहल्ले में देर रात घटित हुआ। क्षेत्र में पिछले कई दिनों से हो रही अनवरत बारिश की वजह से लगभग 100 वर्ष पुराना मकान पूरी तरह नमी सोख चुका था। बताया जा रहा है कि भयंकर गर्मी और बारिश से बचाव के लिए परिवार के सभी सदस्य एसी वाले कमरे में एक साथ सोए हुए थे। देर रात अचानक मकान की ऊपरी मंजिल की जर्जर छत भरभराकर नीचे आ गिरी। जब तक सो रहे परिजनों को कुछ समझ आता, पूरा कमरा मलबे के भारी ढेर में तब्दील हो गया और सब उसमें जिंदा दफन हो गए।
प्रशासनिक अमले ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जोरदार धमाके जैसी आवाज सुनकर पूरे इलाके के लोग दहल उठे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) सिटी आशुतोष मिश्रा भारी पुलिस बल और फायर ब्रिगेड की टीमों के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। राहत एवं बचाव दल ने स्थानीय निवासियों की मदद से बिना समय गंवाए मलबे को हटाने का काम शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद मलबे में दबे सभी सात लोगों को बाहर निकालकर तुरंत नजदीकी जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने छह लोगों को देखते ही मृत घोषित कर दिया।
एक ही झटके में उजड़ गया पूरा श्रीवास्तव परिवार
इस भयंकर त्रासदी में प्रमोद श्रीवास्तव (60 वर्ष) का पूरा परिवार एक झटके में खत्म हो गया। काल के कूर गाल में समाने वालों में प्रमोद श्रीवास्तव के अलावा उनकी धर्मपत्नी रीता (55 वर्ष), सुपुत्र नितिन (25 वर्ष), पुत्रवधू माधुरी (23 वर्ष) और दो नन्हें पोते माधव (1 वर्ष) तथा महज 10 महीने का अद्विक शामिल हैं। दो मासूमों की मौत की खबर ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। परिवार में केवल अमन श्रीवास्तव नाम का युवक ही इस कालभय हादसे में जीवित बच सका है, जिसका गंभीर अवस्था में अस्पताल में उपचार किया जा रहा है।
‘मलबे में दबा था, मदद के लिए चिल्लाता रहा’ — दर्दनाक दास्तान
मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकले अमन श्रीवास्तव ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि जब अचानक उसकी आंख खुली तो वह चारों तरफ से मलबे से घिरा हुआ था और सांस लेना दूभर हो रहा था। उसने हिम्मत जुटाकर खुद को किसी तरह बाहर निकाला और देखा कि उसका पूरा परिवार मलबे के नीचे दबा हुआ था। अमन ने बताया कि उसने अकेले ही अपने परिजनों को निकालने का प्रयास किया, लेकिन असफलता मिलने पर वह जोर-जोर से मदद की गुहार लगाने लगा। चीख-पुकार सुनकर आसपास के पड़ोसी और रिश्तेदार वहां एकत्र हुए।
स्थानीय निवासी पूनम श्रीवास्तव के अनुसार, ऊपरी मंजिल का भारी-भरकम मलबा सीधे नीचे वाले कमरे पर गिरा, जिससे सो रहे लोगों को संभलने का एक मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया।





















































