उत्तर प्रदेश के संत कबीरनगर जिले से एक ऐसा अनोखा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। दो दशक से अधिक पुराने दांपत्य जीवन और पांच बच्चों के माता-पिता बन चुके एक शख्स ने अपनी पत्नी के चल रहे अवैध प्रेम प्रसंग से तंग आकर एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया। पति ने अपने घर में रोजाना होने वाले कलह और क्लेश से हमेशा के लिए मुक्ति पाने के वास्ते पत्नी की इच्छा का सम्मान करते हुए उसका विवाह उसके प्रेमी के साथ करवा दिया। यह अजीबोगरीब मामला अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इस अनूठी शादी पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
प्रेम विवाह के 21 साल बाद जिंदगी में आया भूचाल
यह पूरा मामला धनघटा तहसील के अंतर्गत आने वाले डेबरी गांव का है। यहां के निवासी बुद्धीराम निषाद ने करीब 21 साल पहले फूलमती के साथ अपनी मर्जी से प्रेम विवाह किया था। वक्त बीतने के साथ दोनों का परिवार आगे बढ़ा और उनके पांच बच्चे भी हुए, जिनमें सबसे बड़ा बेटा अब 18 वर्ष का है। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से इस हंसते-खेलते परिवार में उथल-पुथल मच गई। ग्राम प्रधान अजय निषाद और परिजनों के अनुसार, फूलमती का झुकाव अवधेश नाम के एक अन्य व्यक्ति की तरफ हो गया और दोनों के बीच प्रेम संबंध स्थापित हो गए।
घर छोड़कर भागी थी पत्नी, फिर हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा
रिश्तों में आई इस दरार के कारण बुद्धीराम और फूलमती के बीच आए दिन गंभीर विवाद होने लगे। विवाद इतना बढ़ गया कि करीब दो महीने पहले फूलमती अपने प्रेमी अवधेश के साथ घर छोड़कर चली गई थी। हालांकि, उस समय परिवार के हस्तक्षेप और समझाने-बुझाने के बाद वह वापस अपने घर लौट आई थी, लेकिन पति-पत्नी के बीच तनाव और अविश्वास का दौर थमता नहीं दिख रहा था। घर में रोज-रोज होने वाली कलह से बुद्धीराम मानसिक रूप से पूरी तरह प्रताड़ित हो चुका था और उसने इस समस्या का ऐसा हल निकाला जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
शिव मंदिर में गवाहों की मौजूदगी में रचाई गई शादी
परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, बुद्धीराम ने यह फैसला किया कि वह अपनी पत्नी को जबरन अपने साथ रखकर रिश्ते को बोझ नहीं बनाएगा। मंगलवार को स्थानीय लोगों की भारी उपस्थिति के बीच अशरफपुर गांव स्थित एक शिव मंदिर में इस अनोखे विवाह की रस्में पूरी की गईं। सबसे बड़ी बात यह रही कि इस पूरी शादी में खुद बुद्धीराम भी मौजूद रहा और उसने अपनी सहमति से अपनी पत्नी फूलमती का हाथ उसके प्रेमी अवधेश के हाथों में सौंप दिया। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, ये तीनों लोग निषाद समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।
‘रोज-रोज के क्लेश से मिला छुटकारा’ — पति का बेबाक बयान
मीडिया से बातचीत करते हुए बुद्धीराम निषाद ने अपने इस असाधारण निर्णय के पीछे की वजह साफ की। उसने कहा कि उसने दो दशक पहले फूलमती से अपनी मर्जी से शादी की थी, लेकिन अब उसका मन उसके साथ रहने का नहीं था। बुद्धीराम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह अपने घर में रोज-रोज का झगड़ा और मानसिक तनाव नहीं झेलना चाहता था। इसलिए उसने वही उचित समझा जो उसकी पत्नी करना चाहती थी, ताकि वह उस व्यक्ति के साथ शांति से रह सके जिसके साथ वह अपना जीवन बिताना चाहती है। वहीं, स्थानीय पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस मामले में अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।





















































