राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दोपहिया वाहन चोरी की वारदातों को लगातार अंजाम देने वाले एक शातिर अंतर्राज्यीय गिरोह पर गौतमबुद्धनगर पुलिस ने बड़ा शिकंजा कसा है। थाना सेक्टर-126 पुलिस ने सटीक खुफिया तंत्र और तकनीकी सर्विलांस की मदद से एक बड़े वाहन चोर नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए इसके तीन मुख्य गुर्गों को दबोचने में सफलता हासिल की है। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर विभिन्न स्थानों से चोरी किए गए कुल 10 वाहन, एक अवैध तमंचा और कारतूस भी बरामद किया है। इस कार्रवाई से एनसीआर क्षेत्र में सक्रिय वाहन चोरों के सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है।
सुनियोजित घेराबंदी के बाद दबोचे गए शातिर अपराधी
पुलिस आयुक्तालय से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, थाना सेक्टर-126 पुलिस टीम ने बीते 23 जुलाई को गढ़ी शाहपुर कट (सेक्टर-131, नोएडा) के पास एक पुख्ता सूचना के आधार पर जाल बिछाया। पुलिस ने त्वरित और साहसिक कार्रवाई करते हुए संदिग्धों को घेर लिया और मौके से तीन शातिर आरोपियों—विकास कुमार, रोहित और कुलदीप—को गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती पूछताछ में ही यह स्पष्ट हो गया कि ये शातिर अपराधी किसी आम चोर गिरोह का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि एक सुगठित अंतर्राज्यीय नेटवर्क के रूप में दिल्ली और एनसीआर के कई इलाकों में लंबे समय से दोपहिया वाहनों की चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहे थे।
भीड़भाड़ वाले इलाकों को बनाते थे निशाना, ऐसे मिटाते थे पहचान
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने अपने शातिर तौर-तरीकों का खुलासा किया है। यह गिरोह मुख्य रूप से बड़े शॉपिंग मॉल, अस्पतालों, मेट्रो स्टेशनों, व्यस्त बाजारों और घनी आबादी वाले आवासीय परिसरों के बाहर खड़े वाहनों को अपना निशाना बनाता था। किसी भी दोपहिया वाहन को चुराने से पहले आरोपी उसकी बाकायदा रेकी करते थे और मौका पाकर मास्टर चाबी या अन्य तरीकों से वाहन लेकर फरार हो जाते थे।
कानून की गिरफ्त से बचने के लिए ये लोग चोरी किए गए वाहनों को सबसे पहले किसी सुनसान और एकांत स्थान पर छिपा देते थे। इसके बाद, वाहनों की वास्तविक पहचान छिपाने की नीयत से उनके इंजन और चेसिस नंबरों को घिसकर पूरी तरह मिटा दिया जाता था। इस शातिराना तरीके से पहचान मिटाने के बाद वे इन वाहनों को भोले-भाले या कम कीमत के लालच में आने वाले लोगों को सस्ते दामों पर बेचकर अवैध मुनाफा कमाते थे।
यमुना डूब क्षेत्र की झाड़ियों से मिला चोरी का जखीरा
गिरफ्तार अपराधियों से मिली जानकारी और उनकी निशानदेही के आधार पर पुलिस ने सेक्टर-131 के अंतर्गत आने वाले यमुना डूब क्षेत्र की घनी झाड़ियों में एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान वहां छिपाकर रखे गए कुल 10 वाहन बरामद किए गए, जिनमें 9 मोटरसाइकिलें और एक स्कूटी शामिल है। इसके अलावा, गिरोह के सरगना विकास कुमार के पास से एक .315 बोर का अवैध तमंचा और एक जिंदा कारतूस भी बरामद किया गया। बरामद वाहनों में हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिलें, बजाज सीटी-100 और एक टीवीएस जूपिटर स्कूटी शामिल है। जांच में सामने आया कि इनमें से कई वाहनों के इंजन और चेसिस नंबर मिटाए जा चुके थे, जबकि कुछ गाड़ियों के संबंध में दिल्ली और नोएडा के विभिन्न थानों में पहले से ही मुकदमे दर्ज हैं।
लंबा आपराधिक इतिहास और आगे की कानूनी कार्रवाई
पुलिस की छानबीन में तीनों आरोपियों का पुराना और गंभीर आपराधिक इतिहास सामने आया है।
- गिरोह का सरगना विकास कुमार मूल रूप से बुलंदशहर का रहने वाला है और वर्तमान में गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी में रह रहा था। उसके खिलाफ पहले से ही आर्म्स एक्ट के दो मुकदमे दर्ज हैं।
- दूसरा आरोपी रोहित भी बुलंदशहर का मूल निवासी है और नोएडा के सलारपुर इलाके में शरण लिए हुए था। उसके ऊपर लूट, चोरी और चोरी का सामान खरीदने-बेचने जैसे कई मामले दर्ज हैं।
- तीसरा आरोपी कुलदीप, जो बुलंदशहर का ही रहने वाला है, उसके खिलाफ भी चोरी और सेंधमारी के कई संगीन मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस ने पकड़े गए तीनों आरोपियों के खिलाफ थाना सेक्टर-126 में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं और आयुध अधिनियम (आर्म्स एक्ट) के तहत अभियोग पंजीकृत कर लिया है। पुलिस अब इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि चोरी के इन वाहनों को खरीदने वाले खरीदार कौन थे और इस अंतर्राज्यीय नेटवर्क की जड़ें किन-किन अन्य राज्यों या जिलों तक फैली हुई हैं।





















































