उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में न्यायिक आदेशों के अनुपालन में हटाए गए धार्मिक ढांचे के मलबे से एक अप्रत्याशित संरचना सामने आई है। ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब प्रशासन ने उस स्थल से मलबा हटाने का कार्य प्रारंभ किया, तो जमीन के भीतर लगभग 20 फीट गहरा एक प्राचीन कुआं मिला। इस नई संरचना के प्रकाश में आने के बाद जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध करते हुए पूरे क्षेत्र को संरक्षित कर दिया है। अब इस स्थल की ऐतिहासिक और पुरातात्विक पृष्ठभूमि का पता लगाने के लिए विशेषज्ञ एजेंसियों को आमंत्रित किया गया है।
मलबे के नीचे से उजागर हुई रहस्यमयी संरचना
कलेक्ट्रेट प्रांगण में अदालती फैसले के तहत संरचना को गिराए जाने के बाद नगर निगम और प्रशासनिक अमला सफाई अभियान में जुटा हुआ था। इसी दौरान जमीन के मध्य भाग में एक विशाल और गहरा कुआं दिखाई दिया। प्राथमिक माप के अनुसार इसकी गहराई करीब बीस फीट आंकी गई है। अचानक सामने आई इस संरचना को लेकर मौके पर मौजूद अधिकारियों ने तुरंत संज्ञान लिया और संभावित दुर्घटनाओं अथवा अनहोनी से बचाव के लिए कुएं के मुख को सुरक्षित रूप से ढकवा दिया। परिसर में एहतियातन अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।
एएसआई और भारतीय सर्वेक्षण विभाग करेंगे पड़ताल
घटनाक्रम पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करते हुए एसडीएम (सदर) सुबोध कुमार ने बताया कि सक्षम न्यायालय द्वारा पारित निर्देशों के तहत ही संबंधित ढांचे को हटाने की विधिक कार्रवाई अमल में लाई गई थी। उसी प्रक्रिया के दौरान सफाई करते समय यह जल संरचना मिली है। उन्होंने कहा कि इस कुएं की प्राचीनता, निर्माण शैली और ऐतिहासिक संदर्भों को समझने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) तथा भारतीय सर्वेक्षण विभाग (सर्वे ऑफ इंडिया) से विधिवत संपर्क साधा गया है। विशेषज्ञों की संयुक्त टीम मौके का मुआयना कर तकनीकी विश्लेषण करेगी, जिसके बाद ही इस संरचना की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक हो सकेगी।
परिसर का समतलीकरण और मलबे का सुरक्षित निस्तारण
प्रशासनिक मशीनरी ने कलेक्ट्रेट परिसर की जमीन को पूरी तरह से समतल करने का काम पूरा कर लिया है। सुरक्षा और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए गिराए गए ढांचे की प्रत्येक ईंट और अन्य मलबे को कलेक्ट्रेट परिसर से हटाकर शहर की सीमा से लगभग 10 किलोमीटर दूर सुरक्षित स्थान पर डंप कराया गया है। इस अप्रत्याशित संरचना के मिलने के बाद से स्थानीय प्रशासन की निगरानी और सतर्कता पहले से कहीं अधिक बढ़ा दी गई है।
सपा का 119 वर्ष पुरानी संरचना होने का दावा, कमिश्नर से मिलेगा दल
दूसरी ओर, इस प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सियासी गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने गिराई गई इमारत को करीब 119 वर्ष पुरानी बताते हुए मामले में हस्तक्षेप की बात कही है। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के निर्देश पर सपा नेताओं का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल जमीनी हकीकत का जायजा लेने सहारनपुर पहुंच रहा है।
सपा द्वारा जारी आधिकारिक ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि सिविल कोर्ट के आदेश का हवाला देकर ढांचे पर बुलडोजर चलाया गया, जबकि पूर्व में 4 सितंबर की शाम को स्थानीय प्रशासन ने ढांचा केवल सील करने और न गिराने का भरोसा दिया था। पार्टी प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम पर विरोध और अपने तथ्य दर्ज कराएगा। इसके पश्चात यह टीम अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर पार्टी के प्रदेश मुख्यालय को सौंपेगी।



















































