पूरे देश को दहला देने वाले बहुचर्चित निठारी नरसंहार मामले से जुड़े सुरेंद्र कोली का शव उत्तराखंड के हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद होने के बाद यह पुराना घटनाक्रम एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। शुक्रवार को हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में स्थित एक चाय की दुकान से कोली की निष्प्राण देह मिलने से हड़कंप मच गया। शुरुआती संकेतों के आधार पर पुलिस इसे खुदकुशी का मामला मानकर चल रही है, हालांकि घटना की सटीक वजहों का खुलासा वैज्ञानिक जांच और पोस्टमार्टम की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही संभव हो सकेगा। पुलिस प्रशासन ने शव को अपने संरक्षण में लेकर वैधानिक औपचारिकताएं शुरू कर दी हैं और अल्मोड़ा में रह रहे उसके परिजनों को इस बारे में सूचित कर दिया गया है।
चाय की दुकान चलाकर गुजर-बसर कर रहा था कोली
अदालती कार्यवाहियों से राहत मिलने के बाद सुरेंद्र कोली ने धार्मिक नगरी हरिद्वार का रुख कर लिया था। वह भूपतवाला क्षेत्र में एक छोटी सी चाय की दुकान संचालित करके अपनी आजीविका चला रहा था और एकांत जीवन व्यतीत कर रहा था। शुक्रवार को इसी दुकान के भीतर उसका शव पाया गया। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने घटनास्थल की गहन पड़ताल की है। जांच अधिकारी यह खंगालने में जुटे हैं कि घटना के वक्त मौके पर कौन-कौन लोग मौजूद थे, हाल के दिनों में उससे कौन मिलने आया था और मृत्यु से ठीक पहले के हालात क्या थे।
पीड़ित परिवारों ने उठाए गंभीर सवाल, साजिश का अंदेशा
कोली की मृत्यु की खबर जैसे ही नोएडा के निठारी गांव पहुंची, बरसों पुराने जख्म दोबारा ताजा हो गए। वहां रहने वाले कुछ पीड़ित परिवारों और स्थानीय निवासियों ने इस घटनाक्रम को लेकर गहरी शंकाएं जाहिर की हैं। निठारी में कपड़ों पर इस्त्री का काम करने वाले पीड़ित झब्बू लाल और सुनीता ने मामले को आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है। उनका तर्क है कि जब कोली तमाम कानूनी अड़चनों से मुक्त होकर सामान्य रूप से अपना काम कर रहा था और नया जीवन शुरू कर चुका था, तो ऐसे में वह अचानक अपनी जान क्यों देगा? हालांकि, पुलिस प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि यह अभी केवल परिजनों की निजी आशंकाएं हैं और बिना ठोस फोरेंसिक व मेडिकल साक्ष्यों के किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता।
2006 का वह भयानक मंजर जिसने देश को झकझोर दिया था
नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव में वर्ष 2006 के दौरान सिलसिलेवार तरीके से बच्चों और युवतियों के गायब होने की घटनाओं ने देश की रूह कंपा दी थी। 29 दिसंबर 2006 को जब व्यवसायी मनिंदर सिंह पंढेर की डी-5 कोठी के पास नाले से नरकंकाल और मानव अवशेष बरामद हुए, तब इस रूह कंपाने वाले कांड का पर्दाफाश हुआ था। सुरेंद्र कोली उसी कोठी में घरेलू सहायक की हैसियत से काम करता था। जांच एजेंसियों ने पंढेर और कोली दोनों को कई संगीन मुकदमों में मुख्य अभियुक्त बनाया। निचली अदालतों ने कोली को कई मामलों में दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी, जिसके चलते उसने कई दशक सलाखों के पीछे गुजारे।
हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लंबी चली कानूनी लड़ाई
निठारी प्रकरण से जुड़े मुकदमों में कानूनी प्रक्रिया लंबी और जटिल रही। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव और अन्य कानूनी आधारों पर कई मामलों में सुरेंद्र कोली को दोषमुक्त करार दे दिया था। साल 2023 में आए उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसलों के बाद मनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली की जेल से रिहाई का मार्ग प्रशस्त हुआ। मामला देश की शीर्ष अदालत तक भी पहुंचा, जहां 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उसकी क्यूरेटिव याचिका स्वीकार करते हुए आखिरी लंबित मामले में भी उसकी दोषसिद्धि रद्द कर दी थी। इसके साथ ही उसके खिलाफ चल रहे सभी आपराधिक मामलों की कानूनी बाध्यता समाप्त हो गई थी। जेल से छूटने के बाद उसने हरिद्वार में नई शुरुआत की थी, मगर अब इस रहस्यमयी मौत ने कई अनुत्तरित सवाल फिर से खड़े कर दिए हैं।


















































