बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुलंदशहर के शिकारपुर स्थित रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर में एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि एक समृद्ध और विकसित भारत का सपना केवल अधिकारों की निरंतर मांग से पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निर्वहन करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्र का उत्थान तभी संभव है जब नागरिक गुलामी की मानसिकता को पूरी तरह त्याग कर अनुशासन और ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ के भाव को अपने आचरण में उतारेंगे।
सैनिक शिक्षा और अनुशासन का केंद्र
मुख्यमंत्री ने बुलंदशहर की गौरवशाली परंपरा को याद करते हुए कहा कि यह जनपद देश को सबसे अधिक वीर सैनिक और सैन्य अधिकारी प्रदान करने वाली भूमि है। ऐसे में यहां सैनिक विद्यालय की स्थापना अपने आप में एक बड़ा मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर में जो विद्यार्थी अनुशासन और संस्कारों के साथ शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, वे आने वाले समय में राष्ट्र की वास्तविक शक्ति बनेंगे। मुख्यमंत्री ने विद्यालय में बालिकाओं के लिए एक नए छात्रावास के निर्माण की घोषणा की, जिसका नाम रज्जू भैया की माताजी के नाम पर रखा जाएगा। साथ ही, विद्यालय के लिए भूमि दान करने वाले राजपाल सिंह का भी उन्होंने सम्मान किया।
पंच प्रण और गुलामी की मानसिकता से मुक्ति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘पंच प्रण’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत अब आजादी के अमृतकाल से आगे बढ़कर स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ रहा है। इस सफर में सबसे बड़ी बाधा ‘गुलामी की मानसिकता’ है। जब तक समाज इस दकियानूसी सोच से बाहर नहीं निकलेगा, तब तक देश अपनी पूरी क्षमता के साथ विकास की दौड़ में आगे नहीं बढ़ पाएगा। उन्होंने जोर दिया कि हर नागरिक का यह दायित्व है कि वह अपने कार्य को राष्ट्रसेवा मानकर करे। चाहे वह शिक्षक हो, कर्मचारी हो या आम नागरिक, यदि हर व्यक्ति अपना काम ईमानदारी से करे, तो यही सच्ची राष्ट्रभक्ति है।
‘नेशन फर्स्ट’ और जापान का उदाहरण
सैनिकों के जीवन से प्रेरणा लेते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक सैनिक के जीवन का एकमात्र ध्येय ‘नेशन फर्स्ट’ (राष्ट्र प्रथम) होता है। जिस प्रकार सीमा पर सैनिक अपना सर्वस्व न्योछावर करके देश की रक्षा करते हैं, उसी जज्बे की अपेक्षा समाज के हर व्यक्ति से है।
अपने हालिया जापान दौरे के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान परमाणु हमले से तबाह होने के बावजूद जापान ने केवल अनुशासन, कड़ी मेहनत और तकनीक के दम पर विश्व के अग्रणी देशों में अपनी जगह बनाई। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि भारत भी इसी तरह के सामूहिक अनुशासन और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व के बल पर ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को तेजी से हासिल करेगा।
सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सशक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए जाति, भाषा और क्षेत्रवाद जैसे संकीर्ण दायरे से बाहर निकलना होगा। उन्होंने नागरिकों से अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजोने और उस पर गर्व करने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का यह संबोधन देश के युवाओं को नई दिशा और राष्ट्र के प्रति उनके उत्तरदायित्व को याद दिलाने वाला रहा।





















































