भदोही: उत्तर प्रदेश के भदोही जिले से साइबर अपराध का एक ऐसा वीभत्स मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। यहाँ पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘व्हाट्सऐप’ का सहारा लेकर बाल यौन शोषण के वीडियो बेचने और संगठित तरीके से देह व्यापार का काला धंधा चला रहा था। अमेरिकी संस्था से मिले इनपुट के बाद सक्रिय हुई भदोही पुलिस ने जाल बिछाकर मुख्य आरोपी समेत एक महिला को गिरफ्तार कर लिया है।
‘पंजाबी सिमरन’ के नाम से रचा गया था जाल
अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि मुख्य आरोपी शशिपाल सिंह (40) ने ‘पंजाबी सिमरन’ के नाम से एक फर्जी व्हाट्सऐप ग्रुप बना रखा था। इस ग्रुप के जरिए वह खुद को महिला बताकर ग्राहकों को फंसाता था। आरोपी न केवल अश्लील तस्वीरें साझा करता था, बल्कि बाल यौन शोषण से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री (Child Pornography) को भी ऊंची कीमतों पर बेचता था। इसी ग्रुप का इस्तेमाल देह व्यापार के लिए ग्राहकों को लुभाने और महिलाओं की तस्वीरें साझा करने के लिए भी किया जा रहा था। इस पूरे अवैध कारोबार में मनीता यादव (30) उसकी सक्रिय सहयोगी थी, जो न केवल महिलाओं की आपूर्ति करती थी, बल्कि गिरोह के वित्तीय लेन-देन का पूरा हिसाब-किताब भी संभालती थी।
अंतरराष्ट्रीय इनपुट पर भदोही पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक
यह सनसनीखेज मामला तब सामने आया जब अमेरिका स्थित ‘नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन’ (NCMEC) ने ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसार को लेकर भारतीय गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) को अलर्ट भेजा। केंद्रीय एजेंसियों से मिले डेटा और आईपी एड्रेस की ट्रैकिंग के बाद भदोही पुलिस ने घेराबंदी शुरू की। जांच में सामने आया कि गिरोह के तार भदोही के स्थानीय पतों से जुड़े हैं। पुलिस ने जब छापेमारी की, तो शशिपाल सिंह के मोबाइल से व्हाट्सऐप ग्रुप की चैट, बाल यौन शोषण के वीडियो और वित्तीय हेराफेरी के पुख्ता सबूत बरामद हुए।
कानून का शिकंजा: पॉक्सो और आईटी एक्ट में बड़ी कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए ज्ञानपुर थाने में सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम और बच्चों के संरक्षण के लिए बने कठोर ‘पॉक्सो एक्ट’ (POCSO Act) के तहत कार्रवाई की जा रही है। गिरफ्तारी के बाद से ही दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है।
अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि यह व्हाट्सऐप ग्रुप काफी बड़ा नेटवर्क हो सकता है। पुलिस अब उन सभी सदस्यों की पहचान करने में जुटी है जो इस घिनौने ग्रुप से जुड़े थे और वीडियो खरीदते थे। पकड़े गए आरोपियों के डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अन्य साथियों की धर-पकड़ के लिए छापेमारी तेज कर दी गई है। यह कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि साइबर अपराध की दुनिया में छुपे अपराधियों तक पुलिस की पहुंच अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हो गई है।





















































